बदायूं। सोत नदी के किनारे अतिक्रमण से नदी का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है। प्रशासन इस अतिक्रमण को हटाने के लिए सख्त है, जिसके चलते पिछले दिनों पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री का मैरिज लॉन ध्वस्त करा दिया था। इसके कुछ समय बाद एक व्यावसायिक बिल्डिंग और उसके बाद एसएस लॉन पर जेसीबी चलवा दी गई। सोत नदी पर कब्जे को लेकर और नदी की जमीन पर दो-दो स्विमिंग पूल बने होने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद प्रशासन ने इन पर भी निगाह टेड़ी कर दी हैं। जल्द ही इन स्विमिंग पूल को भी ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए संचालक को अतिक्रमण खुद ही हटा लेने के लिए प्रशासन ने एक माह का समय दिया है।
कभी बहता हुआ निर्मल जल सोत नदी की पहचान हुआ करता था। सोत नदी के प्राकृतिक स्रोतों के चलते इसका पानी बेहद ही साफ रहता था, लेकिन जैसे-जैसे स्रोत बंद होने के कारण नदी सूखती गई वैसे-वैसे इस पर भूमाफिया की नजर पड़ गई। हालात ये हो गई कि भूमाफिया की जद में आने के बाद नदी पर पूरी तरह अतिक्रमण कर लिया गया। भूमाफिया ने मैरिज लॉन से लेकर अन्य व्यावसायिक बिल्डिंग तक बना डालीं। यहां तक की उनकी बाकायदा बुकिंग तक की जाने लगी। सपा सरकार के दौरान यहां सबसे ज्यादा कब्जे हुए।
सोत नदी पर कब्जे की शिकायत प्रशासन से लेकर शासन तक लोगों ने की, जिसके बाद जिला प्रशासन की ओर से सोत नदी से अवैध कब्जों को हटाया जाने लगा। सबसे पहले यहां पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री आबिद रजा का मैरिज लॉन ढहाया गया तो उसके बाद एक व्यावसायिक भवन को गिरा दिया गया। पिछले दिनों प्रशासन ने एसएस लॉन पर जेसीबी चलवाकर उसे पूरा ढहा दिया। इधर अमर उजाला ने सोत नदी पर अवैध रूप से बने स्विमिंग पूल की खबर को प्रमुखता से छापा, जिसके बाद प्रशासन ने इस ओर भी अपनी निगाहें टेड़ी कर लीं। जांच में भी स्विमिंग पूल अवैध पाए गए। ऐसे में प्रशासन ने अब इन्हें तोड़ने का फैसला किया है, ताकि सोत नदी को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराया जा सके। प्रशासन की ओर से स्विमिंग पूल संचालक के लिए एक माह का समय दिया गया है।
जांच में स्विमिंग पूल सोत नदी की जमीन पर बने पाए गए, जो पूर्णता अवैध है। स्विमिंग पूल संचालक को एक माह का समय दिया गया है, ताकि वह अवैध कब्जों को हटा ले इसके बाद स्विमिंग पूलों को ध्वस्त किया जाएगा।
- केके अवस्थी, सिटी मजिस्ट्रेट