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रोडवेज बसें तो नाम की.. हालत तो डग्ग्गामार से ज्यादा खस्ता

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बदायूं। यात्री सुविधाओं के नाम पर रोडवेज बसें फिसड्डी साबित हो रही हैं। बसों के मेंटिनेंस पर अफसरों का ध्यान ही नहीं है। निरीक्षण के नाम पर खानापूरी होती रहती है। अगले महीने से सर्दियों शुरू होने जा रही हैं। इससे पहले अब तक बसों के शीशे, खिड़कियां दुरुस्त करने का काम चालू नहीं हुआ है। दातागंज, चंदौसी, फर्रुखाबाद रोड पर खटारा बसों को ही दौड़ाया जा रहा है।
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बदायूं डिपो के बेड़े में 37 अनुबंधित और 126 निगम की बसें हैं। निगम की ज्यादातर बसों का यहां दिल्ली रूट पर संचालन किया जाता है। कुल बसों में 50 से ज्यादा कंडम हैं। इनमें न दरवाजे ठीक हैं और न खिड़कियां, सुरक्षा के इंतजाम भी नाकाफी हैं। किसी सामान्य दुर्घटना में यात्री को प्राथमिक इलाज देने के लिए फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। इनकी जगह साउंड सिस्टम ने ले ली है। अग्निश्मन यंत्रों के नाम पर कुछ बसों में सिलिंडर हैं, लेकिन इनकी मियाद खत्म हो चुकी है। रोडवेज न तो अपनी बसों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर ध्यान दे रहा है और न ही अनुबंधित बसों के संचालकों पर इसके लिए सख्ती कर रहा है। कई बार बसों की स्थिति डग्गामार वाहनों से भी बदतर नजर आती है। आगरा-बरेली रूट को लगभग अन्य डिपो के सहारे छोड़ दिया गया है। अन्य रूटों की बात करें तो बरेली, फर्रुखाबाद, दातागंज, चंदौसी रूट पर खटारा बसों को ही भेजा जाता है। कई बार यह बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। कुछ बसों को बाहर से टिप-टॉप कर दिया गया है, अंदर से दुर्दशा साफ नजर आती है।

सुविधाओं के लिए होती है शुल्क की वसूली
रोडवेज यात्रियों से बस स्टैंड और बस में मिलने वाली सुविधाओं के बदले शुल्क भी लिया जाता है। यह शुल्क बस में यात्रा के दौरान लिए गए टिकट की राशि में शामिल होता है। इसके साथ बाद भी यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति बदतर है। बस स्टैंड हो या फिर रोडवेज बसें, यात्रियों को समस्याओं से दो-चार होना होता है। जिले के उप नगरों के बस स्टैंडों पर भी यात्री सुविधाओं की स्थिति बदतर है।
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रीजन में कमाई के मामले में अव्वल
बरेली रीजन के डिपो की बात करें तो कमाई के मामले में बदायूं डिपो कहीं आगे है। संसाधन, स्टाफ और बेड़े में शामिल बसों के लिहाज से बरेली, रुहेलखंड, पीलीभीत डिपो कमाई के मामले में बदायूं से पिछड़े हुए हैं। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं पर डिपो खास ध्यान नहीं दे रहा।

ज्यादातर बसों को ठीक कर लिया गया है। यात्री सुविधाओं की बेहतरी के लिए कई प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। डिपो का वर्कशॉप दातागंज रोड पर शिफ्ट होने के बाद यहां यात्री सुविधाओं का विकास होगा। कुछ बसों के किलोमीटर पूरे हो चुके हैं। इनको लोकल रूट पर चलाया जा रहा है। यात्रियों को दिक्कत न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
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- राजेश कुमार, एआरएम
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