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स्टांप घोटाले का मास्टमाइंड रोकड़िया गया जेल

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बदायूं। उप कोषागार दातागंज में हुए पांच करोड़ से अधिक के स्टांप घोटाले के मास्टरमाइंड हरीश ने कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जेल भेज दिया। हालांकि घोटाले का आरोपी सहायक अभी भी फरार है। दोनों के खिलाफ पिछले माह रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने रोकड़िया के बरेली स्थित आवास पर छापा मारा, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद आरोपी रोकड़िया ने कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इधर, रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उस समय से अब तक तैनात रहे नौ तहसीलदार और दो नायब तहसीलदार पांच करोड़ आठ लाख 98 हजार 110 रुपये के घोटाले की जांच के घेरे में आ सकते हैं। शासन स्तर से घोटाले की जद में आए सभी अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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पिछले माह दातागंज तहसील में हुए घोटाले का पता चलने पर तहसीलदार ने 19 नवंबर को मामले की तहरीर दी थी। विभाग ने जांच कराई तो पता चला कि अप्रैल वर्ष 2014 से ये घोटाला किया जा रहा है। रोकड़िया द्वारा सरकारी खजाने से खरीदे गए स्टांप कोषागार में जमा नहीं किए। घोटाले पर किसी की नजर न पड़े, इसके लिए मुख्य आरोपी रोकड़िया हरीश कुमार ने अभिलेखों में भी हेराफेरी कर दी थी। जब करोड़ों रुपये के घोटालों का खुलासा हुआ, तो प्रशासन में खलबली मच गई। डीएम कुमार प्रशांत ने भी संबंधित अधिकारियों को तत्काल खुलासा करके दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। घोटाला खुलने की भनक लगते ही रोकड़िया हरीश कुमार और सहायक राजेश फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने जब रोकड़िया हरीश के बरेली स्थित घर पर दबिश दी, तो वहां ताला लगा मिला। इसके बाद भी पुलिस उसकी खोजबीन में लगी रही। दबाव बढ़ने पर रोकड़िया हरीश ने पिछले दिनों कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया।
- ये मामला वर्ष 2014 अप्रैल से चल रहा है। उस समय से लेकर नवंबर तक किसी भी तहसीलदार ने इस तरफ ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। जिसकी वजह से घोटालेबाजों का हौसला बढ़ता गया और वे लगातार घोटाले को अंजाम देते रहे। अप्रैल वर्ष 2014 से लेकर अब तक नौ तहसीलदारों पर चार्ज रहा है, जो अब अलग-अलग जिलों में तहसीलदार से लेकर एसडीएम के पद पर तैनात हैं। वहीं उस वक्त दो नायब तहसीलदारों पर भी दातागंज तहसीलदार का चार्ज रहा था। इसमें से एक नायब तहसीलदार सोहनपाल रिटायर्ड हो चुके हैं।
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- दातागंज तहसील के उप कोषागार में तैनात रहे रोकड़िया हरीश कुमार को विभाग की पूरी जानकारी थी। मालूम था कि जांच के दौरान कौन-कौन से बिंदु पूछे जाते हैं, साथ ही कौन से रजिस्टर चेक किए जाते। इसी का फायदा उठाते हुए उसने अधिकारियों को उलझाने के लिए दो रजिस्टर बना रखे थे। इन दोनों रजिस्टरों में प्रतिदिन की एंट्री की जाती थी। ऐसे में जब भी कोई अधिकारी चेकिंग के लिए आता को सही आंकड़ों वाला रजिस्टर उनके सामने प्रस्तुत करता था, जिसकी वजह चेकिंग के दौरान पकड़ा नहीं जाता था।
दातागंज उप कोषागार में स्टांप घोटाला करने वाले मुख्य आरोपी हरीश ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस पर उसने कोर्ट में आत्म समर्पण किया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
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- कुमार प्रशांत, डीएम
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