बदायूं। इसे व्यवस्था का झोल ही कह सकते हैं कि ट्रैक्टर ट्रॉलियों का बड़े स्तर पर व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। ईंट भट्ठों से लेकर बालू और मिट्टी के अवैध खनन तक कई धंधे ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर ही चल रहे हैं। इसके बावजूद जिले में इनके पास कामर्शियल परमिट नहीं हैं, जिससे सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि ट्रॉलियों पर ‘केवल कृषि कार्य हेतु’ लिखवाने के बाद भी धड़ल्ले से व्यावसायिक इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है और किसी को नजर नहीं आ रहा। कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभागों की चुप्पी भी समझ से परे है।
उप संभागीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड पर गौर करें तो जिले में 40 हजार से ज्यादा ट्रैक्टरों के रजिस्ट्रेशन हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ 10 ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए है। बाकी सभी का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा रहा है, लेकिन यह भी किसी से छिपा नहीं है, कि हजारों की संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉलियों का इस्तेमाल व्यावसायिक हो रहा है। जिले में करीब 260 ईंट भट्ठों पर मिट्टी और ईंट ढुलाई का काम ट्रैक्टर ट्रॉली से ही किया जाता है। लोक निर्माण, बिजली विभाग, जल निगम और स्थानीय निकायों में ठेकेदार भी बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। उप संभागीय परिवहन विभाग की कार्रवाई पर गौर करें तो दोपहिया और चार पहिया वाहनों के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन समेत अन्य मामलों में चालान आदि कार्रवाई तो होती है, लेकिन ट्रैक्टर ट्रॉली ज्यादातर इससे बचे ही रहते हैं।
- मिट्टी और बालू का अवैध खनन करने वालों के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली काफी मुफीद होते हैं। जिले में बड़े पैमाने पर खनन का धंधा किसी से छिपा नहीं है। कादरचौक, उसावां, उसहैत, सहसवान, जरीफनगर, उझानी थाना क्षेत्र इसके लिए सबसे ज्यादा बदनाम हैं। चालू वित्तीय वर्ष के छह महीनों पर गौर करें तो ट्रैक्टर ट्रॉलियों को सीज करने की सबसे ज्यादा कार्रवाई अवैध खनन के मामलों में ही हुई हैं। सितंबर महीने में ही अवैध खनन में 15 ट्रैक्टर ट्रॉली अवैध खनन में पकड़कर सीज किए गए थे।
- दरअसल, ट्रैक्टर ट्रॉली की कृषि कार्य के लिए खरीद करने पर खरीद से लेकर रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स आदि में काफी रियायत मिलती है। ऐसे में ट्रैक्टर ट्रॉलियों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले लोग भी इनकी खरीद कृषि कार्य के नाम पर करते हैं। जिन लोगों का कृषि से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं हैं, उनके पास भी ट्रैक्टर ट्रॉली हैं। इनका इस्तेमाल ईंट भट्ठों, अवैध खनन के साथ अन्य व्यावसायिक कार्यों में भी किया जाता है।
जिले में 40 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर हैं। यह बात सही है कि सिर्फ 10 के पास व्यावसायिक इस्तेमाल का परमिट है। ट्रैक्टर-ट्रॉली कृषि कार्य में काम आते हैं। ऐसे में इन पर रजिस्ट्रेशन से लेकर रोड टैक्स की कई छूट दी जाती हैं। कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। अवैध रूप से व्यवसायिक इस्तेमाल में लिये जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
- एनसी शर्मा, एआरटीओ प्रशासन