बदायूं। शासन से भले ही जिले को आठ डॉक्टर मिले हों, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में जरा सी परेशानी पर भी बच्चे रेफर किए जा रहे हैं। जरूरतमंद निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में कुल 24 डॉक्टर तैनात हैं, इनमें बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। हालांकि जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह स्वयं बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन पदभार बढ़ने के बाद से वह बच्चों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। सोमवार को शासन ने डाॅक्टरों की तैनाती की थी, इसमें सीएमओ के अधीन आठ डॉक्टर मिले थे। इसके बावजूद अभी महिला और जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की दरकार है।
डॉक्टर ने देखते ही बच्चे को कर दिया हायर सेंटर रेफर
मुजरिया निवासी मीना देवी ने बताया कि उनका बेटा आठ साल का है। कई दिनों से उसे बुखार आ रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ी, परिवार वाले घबरा गए और जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन यहां तो डॉक्टर ने देखा ही नहीं। हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। अब बदायूं के ही निजी अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया है।
रात में आधा घंटे बाद मिले डॉक्टर, देखते ही किया रेफर
जरीफनगर क्षेत्र से आए होराम सिंह ने फोन पर बताया कि सोमवार की रात को नौ साल के विवेक को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उम्मीद थी कि अस्पताल में अच्छा इलाज मिल जाएगा। अस्पताल के हालात तो बहुत ही खराब हैं। रात करीब 12 बजे पहुंचे तो अस्पताल में न तो डॉक्टर मौजूद थे न ही कोई कर्मचारी। दो कर्मचारी एक बेंच पर बैठे सो रहे थे। बच्चे की हालत गंभीर होना बताया तो करीब आधा घंटे में डॉक्टर पहुंचे। बच्चे को देखते ही मेडिकल ले जाने को कह दिया। बताया कि यहां कोई बच्चों का डॉक्टर नहीं है। मजबूर होकर बच्चे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया।
पत्राचार किया फिर भी नहीं मिल पा रहे बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह का कहना है कि एक साल से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। तब से लगातार पत्राचार कर डॉक्टरों की मांग की जा रही है। बच्चों को सही समय पर सही इलाज मिल जाए इसके लिए रेफर करने से अच्छा और दूसरा रास्ता नहीं है। बच्चे को रेफर करना मजबूरी है। जब तक डॉक्टर की तैनाती हो जाती तब तक समस्या बरकरार रहेगी।
जिला अस्पताल बदायूं। संवाद