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Budaun News: जर्जर घोषित 123 साल पुरानी इमारत में बैठ रहे हैं बच्चे, जान का खतरा

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जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद
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बदायूं। जूनियर हाईस्कूल सैदपुर की इमारत 123 साल पुरानी है। इसे जर्जर घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके जान जोखिम में डालकर बच्चे इसी के नीचे बैठाकर पढ़ाए जा रहे हैं। अगर खस्ताहाल छत की कोई खपरैल गिरती है तो बच्चों को गंभीर चोट लग सकती है, बावजूद इसके अफसर बेखबर हैं। कुछ अभिभावकों ने तो जोखिम के चलते बच्चों को स्कूल भेजना ही बंदकर दिया है। यही कारण है कि अमूमन स्कूल में 10-15 बच्चों की ही उपस्थिति रहती है।
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लोकसभा चुनाव में सैदपुर के जूनियर हाईस्कूल को जर्जर घोषित करते हुए यहां से चार बूथ हटाकर कन्या जूनियर हाईस्कूल में बनाए गए थे। शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते आज भी इस स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं। इमारत का निर्माण सन 1901 में अंग्रेजी हुकूमत में कराया गया था। उस समय कक्षा आठ की पढ़ाई करने के लिए क्षेत्र में यह एक मात्र स्कूल था।

सवाल यह है कि अगर इमारत जर्जर है तो उसके नीचे बैठाकर बच्चे क्यों पढ़ाए जा रहे हैं। स्कूल में बनाए जाने वाले बूथों को जर्जर होने की वजह से ही हटाया गया था। ऐसे में यहां आने वाले छात्र-छात्राओं और अध्यापकों के साथ कोई हादसा होता है तो जिम्मेदार कौन होगा। विद्यालय में 45 बच्चे पंजीकृत हैं। 10 से 15 बच्चे रोजाना यहां जान जाेखिम में डालकर पढ़ने आते हैं।
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स्कूल खाते में रुपये फिर भी नहीं कराई जा रही मरम्मत
स्कूल के नाम से जमीन है, जिससे हर साल लाखों रुपये की आय होती है। वहीं खपरैल की नीलामी से भी रुपये आएगा। इसके बाद भी न तो खपरैल की नीलामी कराई जा रही है न ही जर्जर बरामदे की मरम्मत। इससे लगातार हादसे का डर बना हुआ है।


बच्चे को स्कूल भेजते से लगता है डर
बेटे निर्देश का दाखिला जूनियर स्कूल में कराया है। अब वहां बरामदे पर पड़ी खपरैल टूटकर गिरने लगी है। कब किस बच्चे के ऊपर जा गिरे कुछ पता नहीं। इसलिए बच्चे को स्कूल भेजते से डर लगता है। - राजू मौर्य, सैदपुर


खपरैल की जगह लिंटर पड़े, तभी बच्चे रहेंगे सुरक्षित
इमारत बहुत मजबूत है, लेकिन बरामदे में पड़ी खपरैल आए दिन नीचे गिर रही है। यही कारण है कि बच्चे को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं हो रही है। जब तक खपरैल की जगह लिंटर नहीं पड़ जाता जब तक वहां बच्चे सुरक्षित नहीं। - सोनपाल, गिरधरपुर




दीवारें काफी मजबूत हैं, छत पर खपरैल
123 साल पुरानी इमारत की दीवारों में कोई दरार नहीं है। दीवारें इतनी मजबूत हैं कि 100 साल और चल सकती हैं, लेकिन छत की खपरैल मरम्मत मांग रही है। अगर मरम्मत करा दी जाए तो यह पूरी इमारत क्षेत्र की पहचान बनेगी। - अखिलेश्वर दयाल सक्सेना, वरिष्ठ नागरिक


जर्जर घोषित स्कूल में बच्चे पढ़ाए ही नहीं जा सकते। अगर ऐसा हो रहा है तो मैं दिखवाती हूं। जर्जर भवन की वजह से बूथ हटाने का मामला संज्ञान में है। जल्द ही कोई व्यवस्था कराई जाएगी। - कल्पना जायसवाल, एसडीएम बिसौली

जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद

जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद

जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद

जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद

जर्जर खपरैल के नीचे खेलते स्कूल के बच्चे। संवाद

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