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बदायूं में बवाल: गैर समुदाय की शिकायत पर रोकी प्रभातफेरी, ग्रामीण अड़े तो पुलिस ने खदेड़ा, 10 लोग घायल

Fri, 16 Jan 2026 03:41 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, इस्लामनगर (बदायूं)

सार

UP Budaun clash news: बदायूं के ब्योर गांव में माघ माह की प्रभात फेरी को पुलिस ने विवादित रास्ता बताकर रोकने की कोशिश की, जिस पर ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा। पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को खदेड़ा। इससे कई ग्रामीण घायल हुए। 

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प्रभात फेरी रोके जाने को लेकर गांव में तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बदायूं के इस्लामनगर क्षेत्र के गांव ब्यौर कासिमाबाद में माघ महीने में प्रभातफेरी निकाले जाने के दौरान शुक्रवार सुबह बवाल हो गया। दूसरे समुदाय की शिकायत पर रास्ता विवादित बताते हुए प्रशासन ने रोक लगाई तो लोग उग्र हो गए। करीब 50 साल पुराना परंपरागत रास्ता बताते हुए ग्रामीण उसी रास्ते से यात्रा निकालने की जिद पर डटे तो पुलिस ने लाठियां फटकार कर उन्हें भगाया। इससे महिला व युवकों समेत दस लोग घायल हो गए।

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ग्रामीणों ने बताया कि वह पुराने रास्ते से ही प्रभातफेरी निकालते आ रहे हैं। सपा सरकार के समय दूसरे समुदाय के लोगों ने रूट को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। उस समय प्रशासन ने कहा था कि रास्ते पर जलभराव व कीचड़ हो रहा है, इससे वह दूसरे रास्ते से प्रभातफेरी निकाल लें। करीब दो साल बाद रास्ता ठीक होने के बाद फिर से इसी रास्ते पर प्रभातफेरी निकलने लगी। आरोप है कि बृहस्पतिवार को गांव के दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने पुलिस से सांठगांठ कर प्रभातफेरी रोकने की कोशिश की।

पुलिस ने फटकारी लाठियां
ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब छह बजे पुलिस फिर गांव पहुंच गई। बिल्सी, जरीफनगर, उघैती, फैजगंज बेहटा आदि थानों की पुलिस बुला ली गई। पीएसी भी आ गई। करीब तीन घंटे तक पुलिस ने प्रभातफेरी में शामिल लोगों को आगे नहीं बढ़ने दिया। गांव के लोग अड़े रहे तो पुलिस ने लाठियां फटकारीं। 

12 घंटे बाद निकलवाई प्रभात फेरी 
सूचना पर पहुंचे एसपी देहात हृदेश कठेरिया व एडीएम प्रशासन अरुण कुमार थाने पहुंच गए। पूरे मामले की छानबीन करने के बाद सामने आया कि सही रास्ते पर ही प्रभातफेरी निकाली जा रही थी। दूसरे समुदाय के लोगों ने भी किसी प्रकार की आपत्ति न होने की बात कही। फिर करीब 12 घंटे बाद अधिकारियों ने अपने सामने ही ग्रामीणों को शांत करते हुए उसी रूट से प्रभातफेरी निकलवाई। 

एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस शुक्रवार सुबह गांव पहुंची। रूट का निर्धारण होने के बाद ही प्रभातफेरी निकालने को कहा। इस पर पुलिस व ग्रामीणों में धक्का मुक्की हो गई। जांच में जो दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी। 

पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल 
जिस रूट पर जाने से रोकने पर पुलिस ने लाठियां फटकारीं और 10 से अधिक लोग घायल हुए, वही रूट सही था। फिर पुलिस ने किसके इशारे पर इतना बड़ा कदम उठाया, अब इसकी जांच होना है। ग्रामीणों का कहना है कि पुराना रूट सही मानने से साफ हो गया है कि थाना पुलिस की मानसिकता ठीक नहीं थी।

थानाध्यक्ष नरेश कुमार और सीओ बिल्सी संजीव कुमार ने अफसरों को गुमराह किया, जिससे मामला इतना बढ़ गया। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया, इसके बाद वे अपने गांव लौट गए।  
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पुलिस पर कार्रवाई की मांग 
ग्रामीणों ने थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मियों पर मारपीट व धार्मिक कार्य में बाधा डालने पर कार्रवाई की मांग करते हुए सामूहिक रूप से एसपी देहात ह्देश कठेरिया को शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोगों ने भले ही बृहस्पतिवार को प्रभातफेरी को लेकर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस को मामले की जांच कर श्रद्धालुओं से बात करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सुबह पांच बजे थानाध्यक्ष नरेश कुमार सिंह व सीओ बिल्सी संजीव कुमार पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और प्रभातफेरी को रोक दिया। एसएसपी देहात ने पूरे मामले की जांच सीओ बिल्सी को सौंपी है। जांच के बाद दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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