सपा से हुए गठबंधन में कांग्रेस के कोटे में गई दातागंज की सीट
सपा और कांग्रेस के बीच हुए गठबंधन ने दातागंज सीट पर एक झटके में पासा पलट दिया। सपा के प्रत्याशी के रूप में चुनाव की तैयारी में दिन-रात जुटे कैप्टन अर्जुन प्रताप सिंह को तगड़ा झटका देकर कांग्रेस के कोटे पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह टिकट झटक ले गए। सपा से टिकट न मिलने से नाराज प्रेमपाल ने शनिवार को ही पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस नेताओं से संपर्क साधा था। दातागंज सीट कांग्रेस के खाते में गई तो उन्हें टिकट मिलने का रास्ता साफ हो गया।
सपा के साथ हुए गठबंधन में कांग्रेस को मिलीं 105 सीटों में से एक दातागंज की सीट भी है। इस सीट पर कांग्रेस की जीत का लंबा इतिहास रहा है। कांग्रेस की संतोष कुमार पाठक यहां से छह बार विधायक रहीं। पिछले दो चुनाव में जनाधार न होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. शैलेश पाठक ने यहां से दमदारी से चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को 53487 वोट दिलाए। 2007 के चुनाव में भी कांग्रेस को इस सीट पर 236809 वोट मिले, तब भी डॉ. शैलेश ही प्रत्याशी थे। गठबंधन मे जिले की एक सीट मिलने के बाद कांग्रेसियों ने सुकून की सांस ली। जिलाध्यक्ष साजिद अली का कहना है कि दातागंज सीट कांग्रेस मजबूती के साथ जीतेगी। उधर टिकट मिलते ही प्रेमपाल के आवास पर समर्थकों की भीड़ जुट गई। कैप्टन अर्जुन प्रताप के खेमे में मायूसी नजर आई।
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प्रेमपाल: सपा के नेता, कांग्रेस के प्रत्याशी
सपा के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ 1992 में दातागंज क्षेत्र में सपा नींव रखी थी। 1993 में दातागंज सीट पर वह मात्र 90 वोटों से चुनाव हार गए थे मगर 1996 में चुनाव जीते और फिर 2002 में भी कब्जा बरकरार रखा। 2007 और 2012 के चुनाव में वह इसी सीट पर दूसरे नंबर पर रहे थे। 25 साल सपा में रहने के बावजूद इस बार दातागंज से कैप्टन अर्जुन प्रताप सिंह को टिकट दिए जाने पर नाराज होकर उन्होंने सपा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कोई घोषणा तो नहीं की लेकिन अंदरखाने कांग्रेस से संपर्क साधे रखा।