आधुनिक युग में एडवांस दिखने की कोशिश में लोग अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। वे तेज रफ्तार से वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करते हैं जो काफी जानलेवा साबित हो रहा है। अक्सर ऐसे हादसों में लोगों की मौके पर ही मौत हो जाती है तो कुछ अस्पताल में दम तोड़ देते हैं। कई मामलों में लोग जिंदगी भर को अपंग हो जाते हैं।
देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है। आंकड़े भी इस बात के गवाह हैं कि ज्यादातर दुर्घटनाओं की वजह वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर बात करना है। उन हादसों में मरने वालों में संख्या भी युवाओं की ही ज्यादा होती है। देखा गया है कि अब तो चलते वाहन पर मोबाइल से बात करना लोगों की आदत सी बन गया है। शायद यही वजह है कि जीवन के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हेलमेट को भी वह लोग नहीं लगाते। ऐसे लोगों का मानना होता है कि हेलमेट के कारण चलते वाहन पर मोबाइल से बात नहीं हो पाती। हालांकि शासन की ओर से इस तरह की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस को निर्देश दिए जाते हैं कि वे वाहन चालकों की काउंसिलिंग और चालान करें। यातायात माह के अंतर्गत लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने को जागरूक भी किया जाता है।
हर माह होते हैं चालान
ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई राममिलन ने बताया कि दोपहिया वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने वालों का ट्रैफिक पुलिस चालान करती है। प्रतिमाह ऐसे वाहन चलाने वाले औसतन 25 लोगों के चालान होते हैं। एआरटीओ अमिताभ राय और उनकी टीम भी ऐसे मामलों में कार्रवाई करती है। उनकी कार्रवाई का फोकस चार पहिया वाहनों पर रहता है जिनके चालक वाहन ड्राइव करते समय मोबाइल पर बात करते हैं।
छात्रों को करते हैं जागरूक
कॉलेज में समय-समय पर छात्रों को समझाया जाता है कि कोई भी चलते वाहन पर मोबाइल से बात न करें। जीवन बहुमूल्य है। एक व्यक्ति के न होने से पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए हर किसी को चाहिए चलते वाहन पर कभी मोबाइल से बात न करे।
- वेदप्रकाश सिंह राठौर, प्रधानाचार्य
युवाओं को देना चाहिए इस ओर ध्यान
चलते वाहन पर मोबाइल से बात करते वक्त दिमाग दूसरी ओर चला जाता है और उसका परिणाम दुर्घटना होता है। इसलिए युवाओं को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करना चाहिए। जरूरी होने पर वाहन को रोककर बात करना ही बेहतर रहेगा।
- जिया अंसारी, छात्र नेता