बदायूं। जिले से 50 से अधिक अवैध बसों का संचालन दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान आदि स्थानों के लिए किया जाता है। टूरिस्ट परमिट की आड़ में ये बसें सिर्फ अवैध रूप से सवारियां ही नहीं ढो रहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पार्सल भी इधर-उधर पहुंचा रहीं हैं। कुछ बसों में तो पार्सल की ऑनलाइन बुकिंग भी की जा रही है। शाम होते ही इन बसों की डग्गामारी शुरू हो जाती है, जो रात भर चलती है। सबसे अधिक डग्गामार बसों का संचालन बिसौली और शहर के नवादा से होता है।
एआरटीओ अमरीश कुमार ने बताया कि जो बसें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की हैं या फिर ऑल इंडिया परमिट की हैं, उनको सवारियां भरने का कोई अधिकार नहीं है, जो बस संचालक 98 हजार रुपये महीने का अतिरिक्त भुगतान करते हैं, वही सिर्फ क्षमता के हिसाब से सवारियां ले जा सकते हैं। बावजूद इसके क्षमता से अधिक सवारियां व पार्सल भरकर शहर के बीचों-बीच से इनका संचालन हो रहा है। ये बसें जीएसटी चोरी का भी बड़ा जरिया बनी हुई हैं।
जीएसटी विभाग भी नहीं करता कोई कार्रवाई
जिले से भले ही ऐसी बसों का संचालन हो रहा है, लेकिन आज तक जीएसटी विभाग ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। यही वजह है कि डग्गामार बसों के संचालकों के हौसले बुलंद हैं। रात में इन बसों का संचालन चौकी, थाना पुलिस की सांठगांठ से अन्य प्रदेशों तक हो रहा है।
राज्य कर उपायुक्त विजय कुमार सैनी ने बताया कि जीएसटी की पूरी कार्रवाई सनमति जैन करते हैं। सनमति जैन ने बताया कि स्लीपर बसों की चेकिंग कर उनके पास से मिलने वाले सामान के आधार पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कब क्या कार्रवाई हुई यह बताने का अधिकार हमें नहीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारी ही बता सकते हैं।
स्लीपर बसोंं को लगातार चेक किया जा रहा है। लगातार कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन सामान अधिक मिलने पर जीएसटी से लोग कार्रवाई करते हैं। बसों के मानक के अनुरूप नहीं होने या नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी है। -अमरीश कुमार, एआरटीओ, प्रवर्तन
निजी बस में इस तरह से छत पर लादा गया सामान। संवाद
निजी बस में इस तरह से छत पर लादा गया सामान। संवाद