संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन का संरक्षण भी टाइगर, घड़ियाल और हाथियों की तरह किया जाएगा। संरक्षित श्रेणी में आने वाली डॉल्फिन की संख्या और गंगा में फिर से इनकी अठखेलियां बढ़ाने के लिए वन विभाग योजना पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) को यह कार्य योजना भेजी जाएगी।
गंगा में डॉल्फिन की अच्छी संख्या है। गंगा नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक ऐसी प्रजाति है, जिसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संगठन और भारतीय वन्यजीव अधिनियम द्वारा संरक्षित जीवों की श्रेणी में रखा गया है। दो महीने पहले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) की टीम ने कछला से उसहैत गंगा घाट तक सर्वे किया था। इस दौरान गंगा में गहराई वाले नौ स्थानों पर डॉल्फिन का प्रवास पाया गया था। यह ऐसे प्वाइंट हैं जहां दुर्लभ प्रजाति की डॉल्फिन अपने परिवार के साथ गंगा में अटखेलियां करती हैं। अब नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने बड़े स्तर पर डॉल्फिन के संरक्षण का निर्णय लिया है। इसके बाद वन विभाग ने स्थानीय स्तर पर डॉल्फिन के संरक्षण के लिए कार्य योजना पर काम शुरू कर दिया है। जिन स्थानों पर गंगा में डॉल्फिन मिली हैं वहां आस-पास के गांवों के लोगों को इनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
डॉल्फिन गंगा में गहराई वाले स्थानों और साफ जल में प्रवास करती हैं। बदायूं में डॉल्फिन का कुनबा बढ़ रहा है। इनके संरक्षण के उपायों के बाद संख्या में और भी इजाफा होगा। जलीय जीवों के जानकारों की मानें तो गंगा में डॉल्फिन का बढ़ता कुनबा बढ़ने से यह भी साफ हो रहा है कि गंगा में प्रदूषण कम होने लगा है।
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ब्लैक बक के संरक्षण को मंजूर हो चुका डीपीआर
- बदायूं में दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक की भी अच्छी संख्या है। गंगा और रामगंगा की कटरी के साथ महाबा समेत अन्य नदियों के कटरी इलाकों में भी ब्लैक बक पाए जाते हैं। जैव विधिता बोर्ड ने वन विभाग से ब्लैक बक के संरक्षण के लिए डीपीआर मांगा था। स्थानीय स्तर पर डीपीआर तैयार कर करीब छह महीने पहले शासन को भेज दिया गया था। इसे प्रदेश सरकार ने मंजूरी भी दे दी है। अब ब्लैक बक के संरक्षण संबंधी डीपीआर को केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय भेजा गया है। वहां से भी इसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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पिछले महीनों डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने गंगा में सर्वे किया था। कछला से अटैना घाट तक नौ स्थानों पर डॉल्फिन मिली हैं। इन स्थानों पर गांव के लोगोंं को डॉल्फिन के संरक्षण को लेकर जागरूक किया जा रहा है। डॉल्फिन के संरक्षण के लिए भी स्थानीय स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। इसे जल्द शासन को भेजा जाएगा। ब्लैक बक के संरक्षण संबंधी डीपीआर को प्रदेश सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। अब यह केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है।
- विवेक कुमार गुप्ता, डीएफओ