ककोड़ा मेला में इस बार भी नहीं होगी घुड़दौड़
बिसौली में तीन माह पहले मिला था पीड़ित घोड़ा
जिले को ग्लैंडर फारसी बीमारी होने के चलते कंट्रोल एरिया घोषित किया जा चुका है। इससे जिले में अश्व प्रजाति के बाहर से आने और जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, जिसके चलते चौथी साल ककोड़ा मेले में होने वाली घुड़दौड़ पर ग्रहण लग गया है।
जिले में ग्लैंडर फारसी रोग के कारण चार साल से मेला ककोड़ा में मिले थे। तब से लेकर अब तक जिले में कहीं न कहीं ग्लैंडर फारसी से पीड़ित घोड़े मिल जाते हैं। इस बार करीब तीन माह पहले बिसौली क्षेत्र में ग्लैंडर फारसी घोड़े के लक्षण मिले थे, जिससे जिसे को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया गया है।
पशु पालन विभाग के मुताबिक ग्लैंडर फारसी रोग से पीड़ित घोड़ा जहां पर मिलता है। वहां से पांच किलोमीटर एरिया में अश्व प्रजाति के सभी जानवरों का सीमन लिया जाता है, साथ ही 10 किलोमीटर एरिया में 50 फीसदी जानवारों का सीमन लिया जाता है, जिसे जांच के लिए अश्व अनुसंधान हिसार में भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो जाती है।
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बीमारी के चलते मारे गए थे पांच घोड़े
कादरचौक। घोड़ों, गधों और खच्चरों में होने वाली जानलेवा संक्रामक बीमारी ग्लैंडर फारसी ने चार साल पहले क्षेत्र में पांव पसारे थे। इसकी जांच में ग्लैंडर फारसी के पॉजिटिव लक्षण मिलने पर नूरपुर के जहीर के पांच घोड़ों को डीएम के आदेश पर मारा गया था, लेकिन घोड़ा मालिक को अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से एक लाख के करीब मुआवजा की फाइल बनाकर भेजी जा चुकी है। शासन से धन उपलब्ध न होने के कारण अभी तक मुआवजा न मिलने से परिवार आर्थिक तंगी के जूझ रहा है।
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जिले में बिसौली क्षेत्र में ग्लैंडर फारसी से संक्रमित घोड़े मिला है। इस वजह से जिले को कंट्रोल एरिया घोषित किया जा चुका है। यह यह जानवरों से मनुष्यों में होने वाली (जेनेटिक बीमारी) है। इसका कोई इलाज नहीं है। इस वजह से सतर्कता बरती जाती है।
डॉ. एके जादौन, मुखय पशु चिकित्सा अधिकारी