ग्रामीणों में मूर्तियों के प्राचीन होने को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ ग्रामीण इसे दो हजार वर्ष पूर्व राजा समुद्रपाल के कालखंड की बता रहे हैं तो कुछ ग्रामीण इसे राजा शालिवाहन के कालखंड की बता रहे हैं। इस मामले को लेकर प्रशासन शनिवार को भी अनजान रहा। एसडीएम ज्योति शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा कुछ है तो वे मामले की जानकारी लेकर रविवार को गांव कोट मौके पर जाएंगी। बहरहाल सच क्या है यह तो पुरातत्व विभाग की टीम के मौके पर आने के बाद ही पता चल पाएगा।
टीले के बराबर है एतिहासिक तालाब
ग्रामीणों के अनुसार जिस टीले की खोदाई के दौरान मूर्तियां मिली हैं, उसके ठीक बराबर में एक बहुत बड़ा तालाब है। एक वर्ष पूर्व ही तालाब की पैमाइश हुई थी। बुजुर्गों के अनुसार हजारों वर्ष पहले इस तालाब में राजा शालिवाहन की पत्नी नहाने आया करती थीं। बुजुर्ग ग्रामीणों के मुताबिक लगभग तीन दशक पहले तक यह तालाब काफी लंबी चौड़ी ईंटों से निर्मित था, लेकिन अब यह पक्का नहीं रहा। इधर, गांव कोट के बच्चों की मानें तो खोदाई के दौरान एक चांदी की चप्पल जैसी वस्तु भी मिली थी। बच्चों के अनुसार उसको जेसीबी का चालक अपने साथ ले गया।