-हर 15 वां बच्चा अतिकुपोषित पाया गया
-जिले में 23629 अतिकुपोषित और 48829 कुपोषित बच्चे मिले
-बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के परीक्षण में हुआ खुलासा
जिले में 23 हजार से ज्यादा बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं और लगभग 48 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। ये आंकड़े जिले के पांच वर्ष तक के लगभग साढ़े तीन लाख बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सामने आए हैं। जाहिर है कि जिले का हर पांचवां बच्चा कुपोषित है और हर 15 वां बच्चा अतिकुपोषित पाया गया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए हाउस होल्ड सर्वे में सामने आए यह आंकड़े चौंकाते हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए योजनाओं के नाम पर हर साल बहुत सारा पैसा बहा रही है लेकिन अफसर कुपोषण मिटा नहीं पा रहे हैं।
हाल में ही बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से पांच वर्ष तक के बच्चों के हेल्थ की जांच के लिए कराए गए हाउस होल्ड सर्वे में इतनी बड़ी संख्या में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चे मिलने से कुपोषण मुक्ति अभियान की हकीकत समझ में आती है। जिले भर में खुले आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए कुपोषण मुक्ति के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं, यह साबित हो रहा है। हकीकत में जिले के अंदर कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की तादाद और ज्यादा है, क्योंकि अभी भी पांच साल तक के 13 हजार से ज्यादा बच्चों के हेल्थ का परीक्षण किया जाना बाकी है।
ये हैं आंकड़े
हाउस होल्ड सर्वे में शून्य से पांच वर्ष तक के तीन लाख 64 हजार 295 बच्चे जिले में थे। इन बच्चों में कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करने के लिए दो बार वजन दिवस का आयोजन किया गया था, जिसमें तीन लाख 51 हजार 185 बच्चों का वजन किया गया था, जबकि 13 हजार 110 बच्चे वजन होने से वंचित रह गए थे। इनसमें अतिकुपोषित 23629 एवं कुपोषित 48829 बच्चे मिले थे।
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वजन दिवस में पांच साल तक के बच्चों का परीक्षण किया गया। उसके आधार पर ही अतिकुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या सामने आई है। दो वजन दिवसों के बाद भी शेष रह गए बच्चों का घर-घर जाकर वजन किया जाएगा। इसके निर्देश आंगनबाड़ी वर्कर्स को दिए गए हैं।
-निर्मल शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी