ब्लॉक स्तर पर परिषदीय स्कूलों के निरीक्षण से लेकर अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों की अब मनमानी नहीं चलेगी। न वे शिक्षकों पर बेवजह रौब गालिब कर सकेंगे और न ही काम से जी चुरा सकेंगे। नए आदेश के तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी ही किसी भी बीईओ का स्थानांतरण जिलेभर में कर सकते हैं। इतना ही नहीं मंडल में तबादले करने का अधिकार एडी बेसिक को दिए गए हैं। जबकि एक मंडल से दूसरे मंडल में शिक्षा निदेशक के पास अधिकार होंगे। अभी तक यह अधिकार सिर्फ आयोग के अधिकारियों के पास ही थे।
काबिले गौर है कि जिले में पहले एबीएसए पद होते थे। इसके बाद इन्हें राजपत्रिक में शामिल करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) में परिवर्तित कर दिया गया। इसके बाद इनके स्थानांतरण के अधिकार एडी बेसिक और बीएसए से छिन लिए गए। चार साल पहले तक इन्हें ट्रांसफर के अधिकार थे। शिक्षाविद् और विभागीय लोगों की माने तो इसके बाद बीईओ को एक तरह से अफसरों का डर ही निकल गया। वह मनमानी करते हुए खुले तौर पर शिक्षकों को परेशान करने लगे। मनमुताबिक कभी ब्लॉक पर जाना और कभी नहीं जाकर भी काम चलाना शुरू हो गया था। बीईओ ब्लॉक पर न रहकर जिला मुख्यालय पर निवास करते हैं। जबकि शिक्षकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। आर्थिक शोषण करने के भी खूब आरोप लगते रहे। कई बार शिकायतें भी हुईं। किसी भी बात से बेफिक्र बीईओ अपनी मनमर्जी से काम करते रहे। शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान न देकर सिर्फ खानापूर्ति करके काम चला लिया गया। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। क्योंकि जिले में स्थानांतरित करने का अधिकार बीएसए को दे दिया गया है। वहीं मंडल स्तर पर एडी बेसिक को यह अधिकार दे दिए गए हैं। आठ दिसंबर को जारी शासनादेश के मुताबिक आदेश दिए गए हैं।