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जान देकर ममेरी बहन को बचाया: कुमकुम को बचाने के लिए गंगा में कूदा तरुण, भंवर में फंसने से डूबकर मौत

Sun, 19 May 2024 05:26 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

कासगंज के सोरों से गंगा स्नान करने श्रद्धालु के साथ हादसा हो गया। श्रद्धालुओं में एक किशोरी गंगा में स्नान करते समय डूबने लगी। उसे बचाने के लिए गंगा में उसका फुफेरा भाई कूद पड़ा। उसने किशोरी की जान बचा ली, लेकिन अपनी जान नहीं बचा पाया।  
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गंगा घाट किनारे खड़े तरुण के परिजन व अन्य लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं के उझानी में कछला गंगाघाट पर हादसे थम नहीं रहे। रविवार सुबह एकादशी का स्नान करने के घाट पर पहुंचे कासगंज के सोरों के श्रद्धालुओं की रिश्तेदार कुमकुम डूबने लगी तो उसे बचाने के लिए फुफेरा भाई तरूण गंगा में कूद गया। उसने कुमकुम को तो बचाकर घाट की ओर धकेल दिया, लेकिन खुद डूब गया। गोताखोर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद उसका शव खोज पाए।

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हादसा सुबह करीब सात बजे पुल के पास हुआ। सोरों के मोहल्ला मढई निवासी प्रमोद दुबे के परिजन और रिश्तेदार गंगा स्नान के लिए घाट पर पहुंचे। महिलाओं और बच्चों के साथ सभी डूबकी लगाने लगे। उसी दौरान प्रमोद के साले की बेटी कुमकुम डूबने लगी। आसपास के लोगों ने शोर मचाया तो उसे बचाने के लिए फुफेरा भाई तरूण (18) पुत्र प्रमोद नदी में कूद पड़ा। उसने कुमकुम को बाहर खींचकर घाट की तरफ धकेला तो वह फिसलकर गंगा की तेज धारा में बह गया। उसे डूबता देख मां हीरा देवी और महिलाओं ने आवाज लगाकर गोताखोरों को बुला लिया।

गोताखोरों के साथ आसपास के नाविक भी तरूण की खोजबीन में जुट गए। पुलिस कर्मियों ने गोताखोरों से जानकारी की। एक घंटे बाद तरूण को खोज निकाला गया। परिवार के लोग उसे एंबुलेंस के जरिये उझानी अस्पताल लाए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। तरूण की सोरों में कॉस्मेटिक के सामान की दुकान है। चिकित्साधिकारी हरीश कुमार ने बताया कि डूबने से तरूण की मौत हुई है। मृतक के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। वह शव लेकर सोरों चले गए।

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20 दिन में 15 श्रद्धालु डूबे, पांच की मौत
कछला गंगाघाट पर 20 दिन में कई हादसे हो चुके हैं। आठ- नौ श्रद्धालुओं को मौके पर जुटे गोताखोरों ने बचा लिया था, लेकिन बिहार में बेगूसराय निवासी छात्र मुनीश कुमार पुत्र अनिल शाह, विवेक शर्मा पुत्र प्रमोद शर्मा, निवासी दतिया, मथुरा, दिल्ली में मंगोलपुरी निवासी कुनाल उर्फ कमल पुत्र बनवारी लाल, कासगंज निवासी पीयूष पुत्र धर्मेंद्र और अब तरूण की मौत हो चुकी है। जबकि राजस्थान के भरतपुर जिले के छवि शंकर का अभी तक पता भी नहीं लग पाया है।

गंगा के भंवर में फंसे तो बाहर निकलना मुश्किल
 कछला घाट पर गंगा में जहां तरूण दुबे डूबा, उसके आसपास गहराई होने के साथ भंवर बताया गया है। चश्मदीद रिश्तेदार अर्जुन ने बताया कि भंवर में जल गोलाई में तेजी से घूम रहा था। तरूण ने कुमकुम को भंवर से पहले ही बचा लिया था। अचानक वह उसी भंवर में फंस गया। फिर किसी को नजर नहीं आया। गोताखोर प्रेमपाल के मुताबिक भंवर में अगर कोई फंस जाए तो उससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। 
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