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Budaun News: जिलेभर में खुले बूथ, भरे गए एसआईआर फॉर्म

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एसआईआर फॉर्म भरने के लिए ​शिविर खोला गया। स्रोत स्वयं
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बदायूं। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत रविवार को जिलेभर में बूथों पर भीड़ देखने को मिली। शासन के निर्देशानुसार एसआईआर फॉर्म भरने व जमा करने के लिए सभी स्कूलों को सुबह से लेकर शाम तक खुले रखने के निर्देश दिए गए थे। अभियान की गंभीरता को देखते हुए जिले के बीएलओ और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को सुबह आठ बजे से ही बूथों पर तैनात किया गया। जहां दिनभर मतदाताओं का आवागमन बना रहा।
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अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में वार्ड और गांववार बूथ बनाए गए। जहां बीएलओ घर-घर सर्वे के साथ-साथ कैंप में भी फॉर्म भरवा रहे हैं। साथ ही विशेष सतर्कता बरती जा रही है। शाम तक हजारों लोगों ने बूथों पर पहुंचकर अपने एसआईआर फॉर्म भरवाए और आवश्यक संशोधन कराए।
कई वार्डों में दिनभर बीएलओ और पर्यवेक्षकों की टीमें घूम-घूमकर लोगों को बूथ तक आने के लिए प्रेरित करती रहीं। बुजुर्ग, महिलाएं और नए मतदाता विशेष उत्साह के साथ फॉर्म भरवाने पहुंचे। कई स्कूलों में भीड़ अधिक होने पर अतिरिक्त कक्ष खोलकर व्यवस्था को सुचारू रखा गया। जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम में लगातार निगरानी की जाती रही और आवश्यकतानुसार टीमों को निर्देश जारी किए जाते रहे।
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एसआईआर अभियान की प्रगति पर नजर रखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप जिलाधिकारी और तहसील स्तरीय अधिकारियों ने भी कई बूथों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बीएलओ से निर्धारित समय सीमा में सर्वे और फॉर्म जमा कराने के संबंध में जानकारी ली और जहां भी कमी दिखी, वहां सुधार के निर्देश दिए।

सहायता शिविर कर रहे लोगों की समस्याओं का निदान
बदायूं। जिले में चल रहे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को देखते हुए बदायूं विधानसभा क्षेत्र में फखरे अहमद शोबी ने लोगों की सहायता के लिए शिविर खोला। शिविर में रोजाना लोग अपने मतदाता फार्म भरवाने, नाम चेक कराने और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए पहुंच रहे हैं।
बताया कि शिविर का प्रमुख उद्देश्य लोगों की एसआईआर से संबंधित दिक्कतों को दूर करना है। उन्होंने बताया कि कई लोगों को 2003 की लिस्ट में अपना नाम खोजने में समस्या आ रही थी। ऐसे सभी मतदाता अब शिविर में आकर पुरानी सूची देख सकते हैं, अपना नाम ढूंढ सकते हैं और सही ढंग से एसआईआर फॉर्म भरवा सकते हैं।
अमिर सुल्तानी ने बताया कि बदायूं विधान सभा के सभी बीएलओ के नंबर शिविर में उपलब्ध करवाए गए हैं। जिससे किसी भी मतदाता को जानकारी लेने में परेशानी न हो। लोग यहां अपनी समस्या लिखित में भी दे सकते हैं, जिसे प्रशासन के सामने रखने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा को देखते हुए यह शिविर शुरू किया गया था और अब तक काफी लोग इससे लाभ उठाकर संतुष्ट होकर लौटे हैं। संवाद

डीएम के आदेशों के बावजूद स्कूल में न शिक्षक पहुंचे न बीएलओ
सैदपुर। एसआईआर कार्यक्रम को गति देने के लिए जिला अधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद भी सैदपुर क्षेत्र में लापरवाही देखने को मिली। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में न तो कोई अध्यापक पहुंचा और न ही बीएलओ मौजूद रहा। स्थिति का संज्ञान लेते हुए नगर पंचायत चेयरमैन इशरत अली खान ने बैठक बुलाई, लेकिन उसमें भी केवल पांच बीएलओ ही पहुंचे और कोई सुपरवाइजर उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण एसआईआर फॉर्म भरने का कार्य गंभीर रूप से प्रभावित रहा। नगर पंचायत में अब तक लगभग 58 प्रतिशत मैपिंग ही पूरी हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम की अंतिम तिथि बढ़ाकर 11 दिसंबर होने की वजह से एसआईआर की रफ्तार और धीमी हो गई है। इसके चलते तहसील प्रशासन में चिंता साफ दिखाई दे रही है। तहसीलदार विजय कुमार शुक्ला और नायब तहसीलदार सृजन यादव ने सभी बीएलओ को कड़ाई से निर्देश दिए हैं कि कार्य को समय पर पूरा किया जाए और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर पंचायत सभागार, प्राथमिक विद्यालय और कन्या संविलियन में हालांकि बीएलओ सक्रिय दिखे, जहां फॉर्म भरने का कार्य लगातार जारी रहा। संवाद

जिले भर में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत रविवार को काम हुआ। इसमें लगे सभी बीएलओ पूरी गंभीरता व मेहनत से काम कर रहे हैं। - डॉ वैभव शर्मा, एडीएम

दिल्ली से आया बेटा, फॉर्म भरवाकर बिना पिता से मिले लौटा
सैदपुर। स्थानीय निवासी लाल मोहम्मद का बेटा रविवार को एसआईआर फॉर्म भरने के लिए दिल्ली से सैदपुर आया, लेकिन पिता से मिलने के लिए कुछ पल भी नहीं निकाल सका। लाल मोहम्मद कई दिन से बेटे के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बीएलओ के पास फार्म जमा कराने के बाद पुत्र परिवार सहित सीधे दिल्ली लौट गया।
बीएलओ से यह जानकारी मिलने पर लाल मोहम्मद बेहद निराश और दुखी हो गए। पड़ोसी और रिश्तेदार भी दोनों के बीच बढ़ी दूरी को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि गलतफहमियों और संवाद की कमी ने रिश्तों में यह ठंडापन पैदा कर दिया है। लाल मोहम्मद अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनका बेटा जल्द उनसे मिलकर रिश्ते की कड़वाहट दूर करेगा और परिवार में फिर से प्यार और अपनापन लौट आएगा। संवाद

दस साल बाद आई परिवार की याद
ऑसफपुर। ब्लाॅक के गांवों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें ऐसे युवक व युवतियां अपने परिवार के पास पहुंचे हैं जिनके द्वारा करीब दस साल पहले रिश्ता ही समाप्त कर लिया गया था। इनमें कई मामले प्रेम प्रसंग से जुड़े भी बताए जा रहे है। यह सब इस समय दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे शहराें में नौकरी कर रहे हैं। लंबे समय से परिवार से दूर रहने वाली युवतियां जब अपने घर पहुंचीं तो उनके कई परिवारिक सदस्यों ने पहचाना भी नहीं। एसआईआर फॉर्म भरने की मजबूरी ने इन सभी को फिर से अपनों के बीच पहुंचकर उनसे हमदर्दी दिखाने को मजबूर किया है। संवाद

एसआईआर फॉर्म भरने के लिए शिविर खोला गया। स्रोत स्वयं

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