पिछले शिक्षा सत्र में कस्तूरबा विद्यालयों में अनाज से लेकर यूनिफार्म और गेम किट की सप्लाई की गई थी। इनकी गुणवत्ता बेहद खराब थी। कई बॉ स्कूलों की वार्डन ने सामान लेने से भी मना किया था, लेकिन ठेकेदारों की दबंगई और माननीयों के दखल के आगे उनकी एक न चली। उन्हें मजबूरन सामान लेना पड़ा था। उस दौरान निरीक्षण में जेडी ने ये मामला पकड़ा तो उन्होंने सप्लाई हुए सामान की जांच कराई, उसमें कई सामान गुणवत्ताहीन पाए गए थे। मसलन, दाल में मिलावट निकली। फाइबर के गद्दे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे। गेम किट की कीमत पचास हजार भरी गई थी, वह भी मानक के अनुरूप नहीं थी। जेडी ने तत्कालीन बीएसए को इन संबंधित ठेकेदारों को आगे से कोई भी कार्य न दिए जाने के निर्देश देते हुए ब्लैकलिस्टेड कर दिया था।
इसके बाद भी मामले ने तूल पकड़ा तो डीएम शंभूनाथ ने इसकी उच्च स्तरीय जांच के लिए दो अधिकारियों की समिति गठित कर दी। ये जांच अभी चल ही रही है। ये जानते हुए भी कि बा विद्यालयों में सामान की गुणवत्ता बेहद खराब थी और मात्रा भी पूरी नहीं दी गई थी, फिर भी विभाग ने भुगतान कर दिया है।
अब हाल में बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले सत्र के कारनामों से सबक न लेते हुए फिर से उन्हीं लोगों को सामान सप्लाई का जिम्मा दे दिया है, जो जेडी द्वारा काली सूची में डाले जा चुके थे। कई छात्र संगठनों ने भी खराब सामान सप्लाई को बंद करने की मांग उठाई है, लेकिन उसको भी अनसुना किया जा रहा है। जानकारों की मानें तो अरहर की जगह दी जा रही खेसारी की दाल स्वास्थ्य के लिए बेेहद खराब है। फाइबर के गद्दों पर लेटने से रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है।
पिछले शिक्षासत्र में बा विद्यालयों में सप्लाई किए गए सामान की गुणवत्ता और कम मात्रा की शिकायतें प्राप्त हुईं थीं, जिसकी जांच जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रही है, पिछले शिक्षा सत्र में सप्लाई किए गए सामान की मात्रा को पूरा करने के लिए ठेकेदारों को कहा गया है। ब्लैक लिस्टेड वाली बात मेरे संज्ञान में नहीं है।
-आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए।