बदायूं। होली से पहले बाजारों में पनीर और खोया (मावा) की मांग चरम पर है। बढ़ती मांग का फायदा उठाकर जिले में मिलावटी और सिंथेटिक पनीर-खोया का काला कारोबार तेज हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के हालिया आंकड़े हालात की गंभीरता बयां करते हैं। बीते तीन महीनों में पनीर के 26 नमूने लिए गए, जिनमें 25 फेल पाए गए। विभाग के अनुसार, पिछले 12 महीनों में कुल 426 नमूने भरे गए।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, बिनावर कस्बा व आसपास के गांव मिलावटी पनीर निर्माण का बड़ा केंद्र बन गए हैं। कस्बा बिनावर में नई बस्ती में तीन फड़, हनुमान मंदिर के सामने एक इकाई, मोहम्मदपुर बिहार में दो-तीन स्थान, भिंदुलिया प्लासी में आधा दर्जन से अधिक यूनिट, ददमई व सेमरमई गांव सिंथेटिक पनीर बनाने का प्रमुख अड्डा हैं। यहां तैयार पनीर की सप्लाई बरेली, शाहजहांपुर, रामपुर, मुरादाबाद और उत्तराखंड तक की जा रही है। त्योहारी मांग बढ़ते ही उत्पादन कई गुना कर दिया जाता है, जिससे व्यापारियों को मोटा मुनाफा होता है।
ऐसे बनता है सिंथेटिक पनीर
जांच में सामने आए तरीके चिंताजनक हैं। असली दूध से बनने वाले पनीर की जगह निम्न तरीके अपनाए जा रहे हैं। इनमें दूध की क्रीम पहले निकाल ली जाती है, जिससे फैट खत्म हो जाता है। बचे पतले दूध (सपरेटा) को तेजाब/ केमिकल डालकर फाड़ा जाता है ताकि ठोस दाना बन सके। मात्रा बढ़ाने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर और स्टार्च मिलाया जाता है। बनावट सख्त व चमकदार दिखाने के लिए रिफाइंड ऑयल और कृत्रिम पदार्थ मिलाए जाते हैं। कुछ मामलों में डिटर्जेंट या यूरिया जैसे रासायनिक तत्वों के इस्तेमाल की भी आशंका जताई गई है, जिससे झाग व टेक्सचर तैयार हो सके। इसी तरह खोया बनाने में भी दूध की जगह पाउडर, सिंथेटिक मिश्रण और कृत्रिम गाढ़ापन देने वाले पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
ऐसे पहचानें मिलावटी पनीर
पनीर को मसलने पर यदि वह रबर की तरह खिंचे, तो शक करें। गर्म पानी में डालने पर सामान्य से अधिक सख्त रहे तो मिलावट की आशंका। आयोडीन की बूंद डालने पर नीला रंग उभरे तो स्टार्च मिला है। स्वाद में साबुन जैसी कड़वाहट या अजीब गंध।
दो माह में पनीर के 26 में से 25 नमूने जांच में फेल हुए है। होली को लेकर विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही है। मिलावट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। - सीएल यादव, सहायक आयुक्त एफएसडीए
सेहत पर सीधा खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके वर्मा के अनुसार, ऐसे मिलावटी उत्पादों के सेवन से उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग पेट व आंतों में संक्रमण, लिवर-किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों व बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। होली पर जब घर-घर में गुझिया, मावा मिठाइयां और पनीर व्यंजन बनते हैं, तब यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
बिनावर क्षेत्र के बिधौलिया गांव में पनीर का नमूना भरती एफएसडीए की टीम। स्रोत- विभाग