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दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक का होगा संरक्षण, डीपीआर मंजूर

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बदायूं। दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक (काला हिरन) को विलुप्त होने से बचाने के लिए जिले में इनका संरक्षण किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने ब्लैक बक को संरक्षित करने के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) को स्वीकृति दे दी है। अब इस डीपीआर को केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। केंद्र से भी इसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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जिले की गंगा-रामगंगा की कटरी से सटे जंगलों के साथ सहसवान के मालपुर ततेरा के जंगलों, बिसौली में अरिल नदी की कटरी के इलाकों में ब्लैक बक हैं, लेकिन इनके संरक्षण की कोई योजना न होने के कारण ब्लैक बक इनकी संख्या कम हो रही है। स्थिति यह है कि पांच साल में ब्लैक बक की संख्या 900 से घटकर 400 के करीब रह गई है। ब्लैक बक के संरक्षण को वन विभाग ने अगस्त 2020 में शासन को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भेजी थी। अब प्रदेश सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय के साथ जैव विविधता बोर्ड ने भी इसे स्वीकृति दे दी है। इसके बाद डीपीआर को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है।
दरअसल, दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक के संरक्षण की अब तक जिले में कोई व्यवस्था नहीं थी। ब्लैक बक के लिए जिले के मौसम के साथ गंगा और रामगंगा की कटरी के इलाके काफी मुफीद हैं। एक समय था जब जिले में बहुतायत में ब्लैक बक हुआ करते थे, लेकिन इनके संरक्षण की योजना न होने के चलते धीरे-धीरे यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्त होने लगी है। हिरन की यह ऐसी दुर्लभ प्रजाति है, जिसके संरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके लिए जिले में अभी तक व्यवस्था नहीं है। अब डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद जिले में इनका संरक्षण हो सकेगा। इसके लिए जंगलों में ब्लैक बक के भोजन और पानी की व्यवस्था करने के साथ ही उनके लिए अनुकूल माहौल भी बनाया जाएगा।
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साल 2020 में हुई ब्लैक बक की अधिकारिक गणना
ब्लैक बक संरक्षण के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाने से पहले वन विभाग ने पहली बार जिले में ब्लैक बक की अधिकारिक गणना 2020 में कराई थी। जिले के चार वन रेंज की 42 बीटों की 470 साइट पर कराई गई गणना में तकरीबन 350 ब्लैक बक मिले थे। हालांकि, जिले में इनकी संख्या 400 से ज्यादा होने की बात कही गई थी। इससे पहले 2016 में तत्कालीन डीएफओ समीर कुमार के समय में हुई अनुमानित गणना में जिले में ब्लैक बक की संख्या करीब 900 होने का अनुमान लगाया गया। गणना के बाद ब्लैक बक के संरक्षण को वन विभाग ने शासन को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भेजी थी।
दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक के संरक्षण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को प्रदेश सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय के साथ जैव विविधता बोर्ड ने भी स्वीकृति दे दी है। डीपीआर को अब केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी को भेजा गया है। उम्मीद है कि वहां से भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी। जिले में ब्लैक बक की अनुमानित संख्या करीब 400 है। केंद्र की मंजूरी के बाद स्थानीय स्तर पर ब्लैक बक के संरक्षण को काम किया जाएगा। - विवेक कुमार गुप्ता, डीएफओ
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