भाकियू (टिकैत) ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना को जमीन देने वाले परिवारों के साथ कॉलेज परिसर में बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। धरने के पहले दिन बीकेडी जिलाध्यक्ष राजेश सक्सेना ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले किसानों के परिवारों के साथ सरकार ने वायदा खिलाफी की है। मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले परिवारों के एक-एक सदस्य को जब तक नौकरी नहीं मिल जाती, तब तक धरना जारी रहेगा।
बरेली-मथुरा हाईवे पर गांव गुनौरा वाजिदपुर के पास करीब 512 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज का काम करीब 80 फीसदी पूरा हो चुका है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए दर्जनों किसानों ने जमीन दी थी। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से पहले उनसे वायदा किया गया था कि सभी किसानों के परिवारों के एक-एक सदस्य को मेडिकल कॉलेज में नौकरी दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज में भर्तियां शुरू हो गई हैं। अब तक किसी किसान के परिवार को नौकरी नहीं मिली है। इसको लेकर किसान आंदोलनरत हैं।
गुरुवार को भाकियू ने किसान परिवारों के साथ मेडिकल कॉलेज में बेमियादी धरना शुरू कर दिया। भाकियू और बीकेडी नेताओं ने कहा कि वह मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले किसान परिवारों के साथ हैं। उनसे किया गया वायदा जब तक सरकार पूरा नहीं करती, तब तक धरना जारी रहेगा। गुरुवार को महेंद्र सिंह यादव, भारत सिंह यादव, रामस्वरूप पाली, देवी पाली, मरोहन लाल कश्यप, धर्मपाल, परमेश्वरी देवी, बलवीर सिंह, सुमित यादव, सोनवती, रामदेवी, मोरश्री, निर्माला, सुरजा, सुशीला, रामप्यारी, गुड्डो, कन्यावती, राममूर्ति, भूदेवी आदि लोग धरने पर बैठे।
इटावा, मैनपुुरी के लोगों को नौकरी देने का आरोप
बदायूं। भाकियू ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज में नौकरी सिर्फ इटावा और मैनपुरी के लोगों को दी जा रही है। स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज करने के साथ उन किसानों को भी तवज्जो नहीं दी जा रही जिन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए दी। भूमि अधिग्रहण होने की वजह से कई किसान परिवार तो यहां भूमिहीन हो गए हैं।