कुछ स्कूलों में एक-दो जनप्रतिनिधि केवल औपचारिकताएं पूरी करके आ गए। बदायूं की सांसद संघमित्रा मौर्य और आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने तो इस बात से ही इन्कार कर दिया कि उन्होंने कोई स्कूल भी गोद लिया है।
बदायूं जिले में परिषदीय विद्यालयों की दशा और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों ने स्कूल गोद लिए थे, लेकिन गोद लेने के बाद इनकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। एक-दो जनप्रतिनिधि जरूर इन स्कूलों में छुटपुट काम कराकर औपचारिकताएं निभाते नजर आए, लेकिन अन्य ने इन्हें बेसहारा छोड़ दिया। यही वजह है कि इन स्कूलों की दशा नहीं सुधर सकी। सबसे उपेक्षित तो स्कूलों को दोनों सांसदों ने किया। उन्होंने तो दो टूक कह भी दिया कि उन्होंने स्कूल गोद लिए हैं, इसकी जानकारी ही नहीं है।
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प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 2022 में जनप्रतिनिधियों ने परिषदीय स्कूलों को गोद लिया था। इन्हें गोद लेने का मकसद था कि जनप्रतिनिधि अपनी देखरेख में स्कूल में जरूरत के मुताबिक काम कराएंगे ताकि वहां बच्चों को बेहतर सुविधाएं और पढ़ाई का माहौल मिल सके। ये स्कूल कॉन्वेंट स्कूलों से मुकाबला कर सके।
मुख्यमंत्री के आह्वान के बाद जनप्रतिनिधियों ने बढि़या-बढि़या स्कूलों को चुन लिया, ताकि यहां पर अगर काम करना पड़े तो बेहद कम से काम चल जाए, लेकिन स्कूलों को चुनने के बाद अधिकांश जनप्रतिनिधियों ने उनकी तरफ पलटकर नहीं देखा। कुछ स्कूलों में एक-दो जनप्रतिनिधि केवल औपचारिकताएं पूरी करके आ गए। बदायूं की सांसद संघमित्रा मौर्य और आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने तो इस बात से ही इन्कार कर दिया कि उन्होंने कोई स्कूल भी गोद लिया है।
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प्राथमिक स्कूल रोटा
- फोटो : अमर उजाला
बारिश में तालाब बन जाता है स्कूल परिसर
वजीरगंज क्षेत्र के गांव रोटा में प्राथमिक विद्यालय काफी अच्छा बना हुआ है। यहां पर अधिकांश सुविधाएं छात्र-छात्राओं को दी जा रही है। कमरों में टाइल्स भी बिछी हुई है, लेकिन स्कूल परिसर में ईंटें बिछी है, वह भी काफी नीची है। ऐसे में बारिश होने पर स्कूल परिसर में पानी भर जाता है। ऐसे में बारिश होने पर बच्चे स्कूल नहीं आते है और पढ़ाई बाधित होती है। सांसद संघमित्रा मौर्य ने इसे गोद लिया था। तब उम्मीद जागी थी कि इस समस्या से छुटकारा मिलेगा। साथ ही और भी सुविधाएं मिलेंगी लेकिन गोद लेने के बाद में आज तक सांसद स्कूल नहीं पहुंचीं।
स्कूल के मुख्य द्वारा पर है नाला, स्लैब तक नहीं
दातागंज क्षेत्र के गांव बराही के प्राथमिक विद्यालय के हालात बेहद खराब है। सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने इस विद्यालय को गोद लिया तो स्टाफ और बच्चे बेहद खुश थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके स्कूल में सुधार होगा और वह भी अन्य अच्छे विद्यालय की तरह इसमें पढ़ सकेंगे, लेकिन उनका सपना साकार नहीं हुआ। जबसे इस स्कूल को सांसद ने गोद लिया है तब से अब तक वह यहां झांकने तक नहीं आए। स्कूल की हालात ये है कि मुख्य गेट से होकर नाला निकलता है। इस पर पक्की स्लैब तक नहीं पड़ी है। ऐसे में कई बार बच्चे गिर जाते हैं। इस वजह से बच्चों को दूसरे छोटे गेट से घर भेजा जाता है।
स्कूल प्रशासन खुद के पैसों से करवा रहा काम
दातागंज क्षेत्र के गांव वक्सेना स्थित प्राथमिक स्कूल को क्षेत्रीय विधायक राजीव कुमार सिंह ने गोद लिया था। गोद लेने के बाद तीन-चार बार विधायक स्कूल पहुंचे। स्टाफ और छात्र-छात्राओं से बात की और चले आए। हालांकि उन्होंने स्कूल में एक हैंडपंप जरूर लगवाया लेकिन और कोई काम नहीं कराया। अधिकांश काम स्कूल स्टाफ या फिर प्रधान ने कराए। स्कूल में कुल 21 कमरे है, जिसमें से केवल चार ही में टाइल्स बिछी हैं।
गोद लेने के बाद एक बार भी झांकने नहीं पहुंचे
संविलियन विद्यालय कादरचौक को शेखूपुर विधायक हिमांशु यादव ने गोद लिया है, लेकिन आज तक वह स्कूल में नहीं गए हैं। ऐसे में तमाम काम स्कूल में होना बाकी रह गए हैं। इसकी वजह से स्टाफ के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत छात्र-छात्राओं को तब होती है, जब बारिश होती है। इस दौरान स्कूल परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है।
आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि उनको इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है तो सांसद संघमित्रा मौर्य का भी यही कहना था कि उन्हें इस संबंध में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी गई। दातागंज से भाजपा विधायक राजीव कुमार सिंह का गोद लिए स्कूल में जाना होता है। उन्होंने स्कूल में एक हैंडपंप भी लगवाया है, लेकिन इससे ज्यादा काम नहीं हो सका है। इसके अलावा शेखूपुर से सपा विधायक हिमांशु यादव को दोपहर चार बजे और सवा छह बजे मोबाइल पर कॉल की लेकिन रिसीव नहीं हुई। इससे पहले भी उन्हें कॉल की गई थी लेकिन तब भी यही स्थिति रही।