मसलन, बसपा ने अगर किसी वैश्य को टिकट दिया तो भाजपा को नुकसान होगा और मुस्लिम प्रत्याशी उतारा तो सपा का मुस्लिम-यादव समीकरण का आधार कमजोर पड़ जाएगा। चुनावी गणित को साधने के लिए भाजपा और सपा की ओर से नये विकल्पों पर भी गौर किया जा रहा है। दोनों ही दल छोटे-छोटे थोक वाले वोट बैंक को अपनी ओर करने के लिए कोई कसर नहीं छोडेंगे। बसपा प्रत्याशी वैश्य या फिर मुस्लिम में से कोई भी हो, लेकिन मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही होने के आसार हैं।
अतिक्रमण हटे तो सुधरे शहर की सूरत
नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में उझानी नगर पालिका परिषद ने जो कार्य किए हैं, वह अन्य के मुकाबले काफी अच्छे हैं। हालांकि स्टेशन रोड समेत कुछेक इलाके में सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पाई हैं। मुख्य बाजार की सड़क चमकदार है तो अतिक्रमण ने उसकी सूरत बिगाड़ दी है। पालिका समेत प्रशासनिक अफसर अतिक्रमण से नागरिकों को रही दिक्कतों के बारे में जानते हैं, लेकिन कार्रवाई शुरू होने के बाद भी बाजार को अतिक्रमणमुक्त कराने की कोशिश नहीं की गई। कई दुकानदार भी अतिक्रमण हटवाने की आवाज उठा चुके हैं।
नवसृजित कॉलोनियों में पानी-सड़कों का अभाव
करीब एक दशक में आवासीय इलाकों की संख्या बढ़ती चली आ रही है। गौतमपुरी मोहल्ले में आंबेडकर चौराहे के पास सहसवान रोड पर नई बस्ती विकसित हो चुकी है। अहीरटोला में संजरपुर रोड ओर मिहौना मोड़ के आसपास का इलाका सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इसी तरह गंजशहीदा की नई बस्ती, सरौरा के पीछे का इलाके के लोग पेयजल और सड़कों के लिए जूझ रहे हैं। रामलीला नगला के लोग खासकर बारिश के दिनों में नाले में उबाल से परेशान नजर आते हैं तो नवसृजित कॉलोनियों में पथप्रकाश की व्यवस्था भी शुरू नहीं हो पाई है।