बुजुर्गों की मानें तो प्रारंभ में यह रामलीला होली चौक पर लगती थी। यहां कुछ लोगों के विरोध के चलते मेला मेला हत्सा के जमींदारी रकबे के बाग में लगने लगा और रामलीला मंचन मोहल्ला ठाकुरान में होने लगा। आबादी बढ़ने के साथ मंचन बाग में ही होने लगा। पिछले लगभग 57 वर्षों से वर्तमान रामलीला मैदान बदायूं रोड पर ही प्राचीन श्रीराम लीला मेला और मंचन एक ही स्थान पर हो रहा है।
ड्रामेटिक क्लब की अहम भूमिका
बिसौली। लगभग 102 वर्षों से अनवरत प्राचीन श्री रामलीला ड्रामेटिक क्लब के स्वयंसेवी कलाकारों द्वारा रामलीला का सजीव मंचन किया जा रहा है। जिसकी क्षेत्र में दूर-दूर तक ख्याति है।
प्रशासन और पालिका का भी सहयोग
बिसौली। प्रशासनिक अधिकारी और नगर पालिका परिषद के जन प्रतिनिधियों के सहयोग से आज यहां रामलीला प्रगति पथ पर अग्रसर है।
ठाकुर निहाल सिंह की मृत्यु के पश्चात पंडित जीवन दत्त ने रामलीला को आगे बढ़ाया। 60वें दशक में तत्कालीन चेयरमैन ने कमेटी को सहयोग किया और वर्तमान रंगमंच की नींव रखवाई। सन 1975 में मोहन लाल साहनी ने रंगमंच का सुंदरीकरण कराया और दोनों साइडों का निर्माण कराया। उसी वर्ष पंडित नत्थू लाल मुखिया ने कमेटी के सहयोग से पक्के झंडी स्थल का निर्माण कराया। मुखिया जी की मृत्यु के पश्चात पंडित श्रीदेव चौबे ने कमेटी को संगठित करते हुए हत्सा की युवा टीम को साथ लिया।1988 में चौबे की मृत्यु के पश्चात डॉक्टर जितेंद्र कुमार के ऊपर रामलीला का दायित्व आया। तबसे अबतक विभिन्न क्षेत्रीय और बाहरी दानदाताओं की मदद से मेले में विकास कार्य अनवरत चालू है।
सहयोग में आए तमाम जनप्रतिनिधि
बिसौली। इसके बाद रापद के मुखिया डीपी यादव और भाजपा नेता प्रेम स्वरुप पाठक ने मंच निर्माण में आर्थिक सहयोग किया।मेले के विकास में ठाकुर निहाल सिंह, देवी सिंह गजराज सिंह, पंडित जीवन दत्त शर्मा, बाबू ब्रज बल्लभ, मुन्ना लाल, चेयरमैन साहू विषेश्वर दयाल, राम प्रसाद मुख्तियार, नत्थू लाल मुखिया, भीमसेन चौबे, तुलाराम चेयरमैन डॉक्टर दुखभंजन शर्मा, जय नारायण मिश्र अशरफी लाल पाठक, पंडित श्रीदेव चौबे, ठाकुर हरगोविंद सिंह डॉक्टर जितेंद्र कुमार आदि का सहयोग रहा है।
कुंडेली वादुल्लागंज में रामलीला 26 से
कादरचौक। ग्राम कुंडेली वादुल्लागंज में रामलीला का आयोजन 26 अक्तूबर से होने जा रहा है। रावण वध चार जनवरी को होगा। ये जानकारी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामनरेश वर्मा ने दी।