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श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

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बांस बरोलिया में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथावाचक दीपक शास्त्री। संवाद - फोटो : BADAUN
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बिल्सी। गांव बांस बरोलिया स्थित वृद्धाश्रम पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को कथावाचक दीपक शास्त्री ने श्रद्धालुओं को श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा को सुनाया।
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कथा व्यास ने कहा कि नारद जी भ्रमण पर निकले तो रुक्मिणी के पिता से मिलकर उन्होंने बताया कि रुक्मिणी का विवाह तीन पगों में तीन लोक नापने वाले त्रिलोकी नाथ श्री कृष्ण जैसे योग्य वर से होगा।
उन्होंने राजा भीष्मक को यह भी बताया कि रुक्मिणी को ब्याहने के लिए उनके घर दो वर आएंगे। नारद जी की बात सुनकर रुक्मिणी के भाई रुक्मण नाराज हो जाते हैं। वह अपनी बहन रुक्मिणी की शादी अपने मित्र राजा शिशुपाल से कराना चाहते हैं। वह राजा शिशुपाल को अपनी बहन के विवाह का प्रस्ताव भेजते हैं और साथ में उनको इस बात की चिंता भी सताने लगती है कि कहीं श्रीकृष्ण बरात लेकर न आ जाएं। इसलिए वह जरासंध को भी अपनी सेना साथ लाने को कहते हैं।
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उधर रुक्मिणी इस बात का संदेश श्रीकृष्ण को भिजवा देतीं हैं। श्री कृष्ण गौरीशंकर मंदिर में पूजा करने पहुंचीं रुक्मिणी को हर ले जाते हैं। जब शिशुपाल और जरासंध को इस घटना का पता लगता है तो वह उनका पीछा करते हैं। रुक्मण को जब यह अहसास हुआ कि श्रीकृष्ण स्वयं नारायण हैं और रुक्मिणी लक्ष्मी जी हैं तो वह श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का स्वयं विवाह करवाते हैं।
कथा के दौरान त्रिदंडी स्वामी दामोदर दास महाराज, आश्रम के संचालक उमाशंकर शास्त्री, वेदव्यास शर्मा, शिवगौड़, धनेश्वर सिंह पुंडीर, रा मकिशोर शर्मा, ह रिओम, खेमपाल, यादकिशोर माथुर, हरीश शर्मा, राजीव शर्मा, प्रमोद शर्मा, वीरेंद्र, मोहित चौहान, वीरेश शाक्य, रामू, गीता गोडसे आदि मौजूद रहे। संवाद
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