लाखों रुपये की लागत से बना सुलभ शौचालय का एक बार भी उपयोग नहीं हुआ। नगर पंचायत को हस्तांतरित होने से पहले ही शौचालय खंडहर में तब्दील हो गया है। यहीं हाल बारातघर का है। दोनों ही निर्माण कार्य डूडा द्वारा कराए गए हैं।
वर्ष 2007-08 में नगर के मोहल्ला परा में डूडा की ओर से करीब सात लाख रुपये की लागत से सुलभ शौचालय बनाया गया। बताते हैं कि स्वीकृत धनराशि का बंदरबांट होने से शौचालय अधूरा रह गया। शौचालय में दरवाजे नहीं लगाए और टैंक भी नहीं बना। तीन तरफ तीन फुट ऊंची दीवारें बनाकर टैंक की औपचारिकताएं निभा दी गईं और भी कई खामियां रह गईं। इसी के बराबर में डूडा ने ही बारातघर बनवाया है। करीब 15 लाख रुपये की लागत से बना अधूरा बारातघर मोहल्ले के उपले थापने, पुआल आदि डालने और बच्चों के खेलने के काम में आ रहा है। सुलभ शौचालय भी रैन बसेरा का काम कर रहा है। दोनों ही निर्माण कार्यों में 22 लाख रुपये की राशि के साथ करोड़ों रुपये की जमीन भी फंसी हुई है।
सुलभ शौचालय और बारातघर के लिए जमीन देने को डूडा ने नगर पंचायत को प्रस्ताव भेजा था। नगर पंचायत ने जमीन मुहैया करा दी। इसके बाद डूडा ने किसी तरह का संपर्क नहीं किया है और न ही हस्तांतरण के संबंध में पत्राचार किया है।
-संजय जैसवार, ईओ नगर पंचायत, दातागंज।