जिसमें लेखपाल, पुलिस, फायर ब्रिगेड, असलहा विभाग व तहसील प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन किसी जिम्मेदार ने उमेश चंद्र की दुकान व उसके द्वारा पटाखे बनाए जाने वाले स्थान का सत्यापन नहीं किया गया था। जबकि उसके पास पटाखे बनाने व बेचने का लाइसेंस था। जिसके चलते उसने लाइसेंस की आड़ में घनी आबादी के बीच खुद के ही दो मंजिला मकान को अवैध पटाखा फैक्टरी बना रखा था।
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इसके चलते जिम्मेदारों पर सवाल उठना भी लाजिमी है। जहां सत्यापन करने वाले प्रशासनिक अमले को भनक नहीं थी। वहीं, थाने से लेकर हल्का बीट कांस्टेबल को भी इस फैक्टरी की भनक नहीं थी। ऐसे में एसएसपी ने बीट के कांस्टेबल माया स्वरूप वर्मा को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, उसावां इंस्पेक्टर वीरपाल सिंह व हड़ौरा चौकी इंचार्ज ओमप्रकाश के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करा दी है। एसएसपी ने सीओ उझानी को जांच सौपी हैं।