फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गेहूं की फसल पर पछुवा हवा की मार

Sun, 26 Feb 2017 11:41 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
विज्ञापन
गेहूं की फसल पर पछुवा हवा की मार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
खेत की नमी में हुई कमी, सिंचाई की तो गिरेगी फसल
विज्ञापन

गेहूं की पिछती फसल को सर्वाधिक नुकसान की आशंका
पिछले चार-पांच दिन से चल रही तेज पछुवा बयार ने गेहूं उत्पादकों का हलक सुखाने का काम शुरू कर दिया है। गेहूं के कल्ले फूटने के दिनों में एक तो बूंदाबांदी कोई खास नहीं हुई लेकिन बढ़वार के साथ फसल वयस्कावस्था में पहुंची तो पछुवा हवा ने खेतों की नमी सोखने का काम कर दिया। सिंचाई करने पर फसल के गिरने की आशंका के बीच काश्तकार उत्पादन में गिरावट का आकलन करने लग गए हैं।
इस बार गेहूं की बुवाई समय से करीब दो-तीन सप्ताह लेट शुरू हुई थी। गेहूं को पकने के लिए 110 से 120 दिन चाहिए। तापमान भी 25 डिग्री के आसपास रहे तो हालात ज्यादा अनुकूल साबित होते हैं। तापमान हालांकि गेहूं के अनुरूप है लेकिन जिस तेजी से पछुवा बयार ने असर दिखाया, उससे तो यही लगता है कि आने वाले में नुकसान ही रहेगा। फसल को पर्याप्त नमीं मुहैया कराने के लिए तेज हवा के दौरान खेत में सिंचाई भी खतरे से कम नहीं। सिंचाई करने पर गेहूं के पौधे गिर सकते हैं। काश्तकारों में भागमल चौधरी ने बताया कि पछुवा बयार होली के बाद चलती तो गेहूं पकने ही स्थिति में होता। पिछेती गेहूं में खासकर पूसा प्रजाति की फसल को तो पकने के लिए अभी कम से कम एक महीना का वक्त चाहिए। पछुवा बयार पूसा प्रजाति का तो खेल खराब कर देगी।
विज्ञापन

-------
आलू-टमाटर नहीं दे पाए लागत की रकम
उझानी। अन्नदाता की मुसीबत की शुरूआत ही पिछले महीना हो गई थी। आलू की बुवाई से लेकर खुदाई तक प्रति बीघा जो लागत आई उत्पादन से किसानों को उसका आधा भी नहीं मिल पा रहा है। आलू को थोक रेट इन दिनों तीन सौ रुपया प्रति क्विंटल तक भी नहीं पहुंच पाया है। जबकि पिछले साल थोक में आलू सात सौ रुपया प्रति क्विंटल खेत में बिक गया था। इसी तरह टमाटर ने भी किसानों को के चेहरे की रौनक उड़ा दी है। आठ-नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक बिकने वाले टमाटर का भाव चार सौ रुपया तक नहीं पहुंच पाया है।
विज्ञापन

--------
तापमान गेहूं की फसल के अनुरूप बना हुआ है। दिक्कत पछवा हवाओं को लेकर है। किसानों को सिंचाई करते वक्त हालात पर गौर करना चाहिए। हवा तेज हो तो सिंचाई करने से परहेज रखें। हवाएं ऐसे ही चलीं तो गेहूं उत्पादकों को उत्पादन के रूप में नुकसान उठाना पड़ेगा।
-डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें