सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को हो रहा नुकसान
बाहर से नहीं आ रहे आलू, फूलगोभी के थोक खरीददार
नोटबंदी के 29 दिन बाद भी स्थिति पटरी पर नहीं आ रही। इसका असर मंडियों पर भी देखा जा सकता है। भाव किरने से किसानों के साथ व्यापारी भी हलकान हैं। सर्दियों के सीजन में जिले में आलू, फूलगोभी, हरी मिर्च और टमाटर आदि सब्जियों का बहुतायत में उत्पादन होता है। आलू और फूलगोभी नेपाल समेत पूर्वांचल के जिलों में भी सप्लाई होती है। नोटबंदी के बाद दूसरे जिलों के बड़े व्यापारी खरीदारी को नहीं आ रहे। इसका खामियाजा स्थानीय किसानों के साथ सब्जी के बड़े व्यापारियों को भी भुगतना पड़ रहा है।
बदायूं और उझानी की मंडी सब्जियों के कारोबार के लिए आस-पास के जिलों में भी पहचान रखती हैं। बदायूं से आलू, फूल गोभी और टमाटर की सप्लाई कई जिलों में होती है। नोटबंदी के बाद सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। नगदी की जमी के चलते दूसरे जिलों के व्यापारी यहां नहीं आ रहे। इतना ही नहीं स्थानीय मंडी में सब्जियों के भाव में भारी गिरावट आई है। सबसे ज्यादा आलू और फूलगोभी की स्थिति खराब है। आमतौर पर इस सीजन में 10 से 12 रुपये किलो बिकने वाली फूलगोभी का थोक भाव एक से दो रुपये किलो रह गया है। वहीं आलू गिर कर 300 से 350 रुपये क्विंटल पर आ गया है। नोटबंदी की वजह से किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल रहा।
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-नोट बंदी के बाद थोक भाव
आलू- 300 से 350 रुपये क्विंटल
फूल गोभी- 1 से 2 रुपये किलो
हरी मिर्च- 3 से 5 रुपये किलो
टमाटर- 12 से 15 रुपये किलो
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नोटबंदी का व्यापार पर असर
नोटबंदी का असर सीधा व्यापार पर दिख रहा है। नगदी की कमी की वजह से बाहर के व्यापारी मंडी नहीं पहुंच रहे हैं। इससे कीमतें गिरी हैं।-संजीव
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नोटबंदी से सप्लाई ठप
बदायूं से टमाटर की सप्लाई आस-पास के कई जिलों में होती है। इस साल सब्जियों का अच्छा उत्पादन हुआ है। नोट बंदी से सप्लाई ठप है।-रईस
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आलू का सबसे बुरा हाल
नोटबंदी में सबसे बुरा हाल आलू का है। पिछले साल के मुकाबले कीमतों में प्रति क्विंतल 100 से 125 रुपये तक की गिरावट आई है।-मुस्ताक
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किसान को हो रहा नुकसान
नोटबंदी से किसान को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। अगर वह औने-पौने दामों में सब्जी नहीं बेचेगा तो सब्जी खराब हो जाएगी।-सुनील