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नामजदों की गिरफ्तारी के बाद कसेगा बैंक अफसरों पर शिकंजा

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बदायूं। पंजाब नेशनल बैंक बिसौली शाखा में यूपी पावर कारपोरेशन के 64.56 लाख रुपये के चेकों का निजी खातों में भुगतान कर रकम हड़पने के मामले में बैंक अफसर भी नहीं बच सकेंगे। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधकों और कैशियरों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। दरअसल, रीजनल हेड प्रवीन कुमार जैन की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में किसी बैंक अफसर का नाम नहीं है। उन्होंने एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी और उसके परिवार के छह लोगों को नामजद किया है। इसको लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
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पंजाब नेशनल बैंक में वर्ष 2009 से 2017 तक यूपी पावर कारपोरेशन के चेकों का भुगतान निजी खातों में करके रकम हड़पी जाती रही। वर्ष 2018 में मामला सामने आया तो एक्सईएन विद्युत वितरण खंड तृतीय विनय कुमार ने बैंक प्रबंधन को कई पत्र लिखे। दबाव बढ़ने पर बैंक ने अपने स्तर से जांच कराई। करीब एक साल के बाद दिसंबर 2019 के अंतिम सप्ताह में घपलेबाजी का खुलासा हो गया। पीएनबी के रीजनल हेड प्रवीन कुमार जैन की तहरीर पर पुलिस ने चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी वीरबाला, उसके पति भोले, बेटे संजय समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह सभी वीरबाला के नाते रिश्तेदार हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर एक महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने अपने बेटे और पति के साथ मिलकर कैसे इतनी बड़ी रकम हड़प ली। कंप्यूटरीकृत बैंक प्रणाली होने के बावजूद आठ साल तक किसी भी शाखा प्रबंधक और कैशियर को इसके बारे में पता तक नहीं लगा। इस पर बैंक अफसर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। इधर, बिसौली पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश में सोमवार को उनके घरों पर दबिश दी। आरोप परिवार समेत अपने घरों से भागे हुए हैं। इंस्पेक्टर पंकज लवानिया का कहना है कि जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपियों से पूछताछ के बाद कुछ नाम और सामने आने की बात से भी वह इंकार नहीं कर रहे।
कहीं मोहरा तो नहीं बन गई चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी
- यूपी पावर कारपोरेशन के चेकों की 64.56 लाख रुपये की रकम आठ साल में 85 ट्रांजेक्शन के जरिये वीरबाला, उसके पति भोले, बेटे संजय समेत सात नाते रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की गई। चर्चा इस बात की भी है कि शायद कम पढ़ी लिखी वीरबाला को मोहरा बना गया हो। इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि रकम का कई लोगों के बीच बंदर बांट किया गया होगा।
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बैंक प्रबंधन को मैं तो एक साल से पत्र लिख रहा था कि 2009 से 2017 तक पावर कारपोरेशन के चेकों का न तो भुगतान हुआ और न ही चेक वापस किए गए। घपले की आशंका भी जताई थी। बैंक ने गंभीरता से नहीं लिया। मेरी ओर से भी बैंक प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई थी। अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। इतनी बड़ी धनराशि हड़पने में बैंक अफसरों की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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- विनय कुमार, एक्सईएन विद्युत वितरण खंड तृतीय
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