फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोटाले में फंसेगी बैंक और पावर कार्पोरेशन के कई अफसरों की गर्दन

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेकों का भुगतान महिला बैंक कर्मी के बेटे के निजी खाते में करीब नौ साल तक होता रहा, लेकिन बैंक के साथ पावर कॉर्पोरेशन तक के अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लगी। लाखों रुपये का घोटाला होता रहा। जाहिर है कि मामले में उच्चस्तरीय जांच में बैंक अफसरों के साथ पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन अफसरों की गर्दन भी फंसेगी। गौर करने वाली बात यह है कि बैंक और पावर कॉर्पोरेशन का हर साल ऑडिट भी होता है। करीब नौ साल तक ऑडिट टीम भी घोटाले को नहीं पकड़ सकी।
विज्ञापन

दरअसल, चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी वीरवाला के स्थान पर उसका बेटा संजय बैंक में काम करता था। बैंक अधिकारियों ने संजय को चेक क्लियरेंस का काम सौंप रखा था। संजय खुद ही समय-समय पर विद्युत वितरण खंड तृतीय कार्यालय जाकर वहां से चेक ले आया करता था। यह चेक पीएनबी के अलावा विभिन्न बैंकों के हुआ करते थे। बैंक में वाउचर भरने के बाद चेक को संजय ही क्लियरेंस के लिए संबंधित बैंक ले जाता था। वहां से चेकों का भुगतान पीएनबी बिसौली के खाते में कर दिया जाता था। बताते हैं कि बैंक अधिकारियों, एकाउंटेंट की मिलीभगत से यूपी पावर कॉर्पोरेशन के बैंक में उपलब्ध वाउचर्स में हेराफेरी कर चेकों की रकम संजय के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। इस खाते से रकम निकालने के बाद इसका बंदरबांट कर लिया जाता था। नौ साल तक बैंक, पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं गया। ऐसे में यह खेल बिना किसी रोक-टोक चलता रहा। ऑडिट टीम भी नौ साल में एक बार भी अनियमितताओं को नहीं पकड़ सकी। जून 2018 में एक्सईएस विनय कुमार ने विद्युत वितरण खंड तृतीय का चार्ज संभाला। कुछ समय के बाद यह घोटाला उनकी नजर में आ गया। लंबे समय तक बैंक प्रबंधन को लिखा-पढ़ी की गई। इसके बाद अब यह घोटाला पूरी तरह से खुला है। इधर, करीब एक महीने से संजय लापता बताया जा रहा है। बैंक या पावर कॉर्पोरेशन की ओर से इस संबंध में पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी गई है। दोनों की ओर से जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से कराने की संस्तुति की गई है।
महिला बैंक कर्मी की सेवानिवृत्ति रोकी गई
बिसौली। पावर कॉर्पोरेशन के चेकों का भुगतान बैंक की चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी वीरवाला के बेटे संजय के खाते में किया जाता रहा। वीरवाला को 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होना था। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक सुशांक ने बताया कि 80 लाख का घोटाला सामने आने के बाद वीरवाला की सेवानिवृत्ति रोक दी गई है। हालांकि, जांच में प्रथम दृष्टया महिला बैंक कर्मी की संलिप्तता नहीं पाई गई है। फिर भी जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन

ईओडब्ल्यू ने पीएनबी से मांगे घोटाले के साक्ष्य
बिसौली। बैंकों में घोटालों की जांच करने वाली ईओडब्ल्यू ने पीएनबी के रीजनल ऑफिस से घोटाले के संबंध में साक्ष्य मांगे हैं। सूत्रों ने बताया कि इसी के चलते बुधवार को बरेली रीजनल ऑफिस से सीनियर मैनेजर छोटेलाल आर्य बिसौली पहुंचे थे। उन्होंने मामले में जांच करने के साथ शाखा प्रबंधक सुशांक और पावर कार्पोरेशन के एक्सईएन विनय कुमार से भी बात की। सूत्रों ने बताया कि घोटाला से जुड़े कुछ कागजात वह अपने साथ ले गए हैं। हालांकि, स्थानीय अधिकारी इसकी पुष्टि करने से कतरा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें