बदायूं। हाल ही में बरेली में जिंक-एल्यूमीनियम ओवरहेड टैंक से जुड़े हादसे के बाद जल निगम ने जिले में प्रस्तावित 22 ऐसे टैंकों के निर्माण पर रोक लगा दी है। जल निगम ने एहतियातन यह फैसला लिया है, ताकि जिले में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। जिन स्थानों पर जिंक-एल्यूमीनियम टैंक प्रस्तावित थे, वहां आरसीसी (रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) के ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे।
जल जीवन मिशन योजना के तहत जिले में 869 ओवरहेड टैंक बनाए जाने हैं। इनमें से 370 ओवरहेड टैंक का काम पूरा हो गया है, जबकि 379 जगहाें पर अभी टैंक को बनाने का काम चल रहा है। हालांकि 120 स्थानों पर अभी काम शुरू नहीं हुआ। इनमें से 22 जगहों पर जिंक-एल्यूमीनियम टैंक बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर जल निगम ने सहमति दे दी थी। कारण, यह टैंक कम समय में तैयार हो जाते हैं। लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है।
हालांकि बरेली में हुए हादसे के बाद निगम ने इनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई है। जल निगम के अधिकारियों का मानना है कि आरसीसी टैंक अधिक मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं। इसी वजह से अब जिले में निर्माणाधीन और प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है। उनके अनुसार, जिले में जिंक-एल्यूमीनियम टैंक निर्माण शुरू होने वाला था। अब इस कार्य पर रोक लगा दी है। इसको लेकर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को भी निर्देश दिए गए हैं।
जल निगम के एक्सईएन अमित कुमार वर्मा का कहना है कि पेयजल योजनाओं में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। लोगों को सुरक्षित और बेहतर पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब आरसीसी टैंकों के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
सात हजार किमी पड़ चुकी है पाइप लाइन
जल निगम की ओर से 2277 करोड़ रुपये से काम पूरा होना है। इसमें से 1100 करोड़ रुपये से काम हो चुका है। इसके तहत जिले में 7200 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाल जानी है। इसमें से अब तक 7000 किमी लंबी पाइप लाइन जिले में डाली जा चुकी है। हालांकि जल निगम का दावा है कि जिले में 966 गांवों को शुद्ध पेयजल दिया जा रहा है।
अधूरी परियोजनाओं से ग्रामीण हो रहे परेशान
कुंवरगांव। इमलिया गांव में पिछले दो साल से ओवरहेड टैंक बनाया जा रहा है। अब तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। गांव में सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं हैं। अधिकांश लोगों के यहां अब तक कनेक्शन तक नहीं हुए हैं। संवाद
खुदी पड़ी सड़कों से लोग परेशान
उघैती। गांव टिटौली में करीब ढाई साल पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण शुरू हुआ था। अधिकांश जगहों पर पाइप लाइन डालने के बाद सड़कें खुदी ही छोड़ दी गईं हैं। खुदी हुई सड़कों से लोग परेशान हैं। कई जगहों पर मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद ही सड़कों को बंद कर दिया ताकि वह लोग आ जा सकें। संवाद
जिले में अभी 120 ओवरहेड टैंक का निर्माण किया जाना है। इनमें से 22 जिंक व एल्यूमीनियम से बनाए जाने थे, लेकिन बरेली में हुए हादसे के बाद इस पर रोक लगा दी गई है। -अमित कुमार वर्मा, एक्सईएन जल निगम
उघैती के टिटौली गांव में टूटी पड़ी सड़क। संवाद
उघैती के टिटौली गांव में टूटी पड़ी सड़क। संवाद
उघैती के टिटौली गांव में टूटी पड़ी सड़क। संवाद
उघैती के टिटौली गांव में टूटी पड़ी सड़क। संवाद
उघैती के टिटौली गांव में टूटी पड़ी सड़क। संवाद