बदायूं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में खुशहाली तो जताई गई है मगर खुशी की बातें गिनती की बताई गईं हैं। मसलन टैक्स स्लैब में राहत, बैंक में रखी जाने वाली राशि की गारंटी एक से बढ़ाकर पांच लाख आदि घोषणाएं गिनती की हैं तो अन्य लोकलुभावन योजनाएं धरातल पर उतरने के बाद ही समझ में आने वाली हैं।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को पेश किए गए बजट पर सुबह से ही लोगों की निगाहें लगी रहीं। हर किसी को उम्मीद थी कि सरकार इस बार हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ पिटारा जरूर खोलेगी। बजट शुरू होने के बाद ही घरों में लोग जहां टीवी से चिपककर बैठ गए, वहीं गली मोहल्लों में भी इस बात की चर्चा रही कि बजट में क्या होगा। सबसे ज्यादा चिंतित मध्यमवर्ग दिखा, क्योंकि यही वह वर्ग है जो बजट से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। बजट आने के बाद हर किसी ने अपने हिसाब से प्रतिक्रिया दी। जहां अधिकतर लोगों ने इसे आम आदमी समेत नौकरीपेशा लोगों और कामकाजी महिलाओं को राहत देने वाला खास बजट बताया तो वहीं विरोधियों ने इसे उम्मीदों पर पानी फिरा देने वाले बजट की संज्ञा देकर उपहास उड़ाया। बजट को लेकर महिलाओं, राजनेताओं, व्यापारी समेत आम आदमियों से इस बारे में रायशुमारी की गई तो उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं दी।