बदायूं डिपो के डीजल पंप में पानी होने का पता लगते ही विभाग में खलबली मच गई है। डीएम शंभूनाथ तक जब मामला पहुंचा तो उन्होंने आपूर्ति विभाग के साथ सिटी मजिस्ट्रेट को भेज पंप से डीजल की डिल्ीवरी अग्रिम आदेश तक बंद करा दी है।
आईओसी के अधिकारी से टैंकों के डीजल की जांच को सेंपलिंग कराई है। डीजल में पानी की मिलावट का खुलासा तब हुआ जब डिपो की बसें जहां तहां बंद होने लगीं। बस चालकों ने इस संबंध में एआरएम को भी जानकारी दी। किसी ने फोन पर डीएम को बताया तो इस मामले की जांच कराई गई है।
पिछले दिनों से चालक एआरएम जेपी सिंह की डांट खा रहे थे। जहां बसों को एवरेज नहीं आ पा रहा था, वहीं जहां-तहां बसें खड़ी हो रही थीं। तीन नई बसें भी जब रास्तों में बंद हुई तो इस पर चालकों ने डीजल देखा जो सामान्य से अलग झाग युक्त था। चालकों ने इस संबंध में एआरएम को स्थिति से अवगत कराया। इस बीच किसी ने डीएम को भी सूचना दे दी। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर को आपूर्ति विभाग के साथ मौके पर पहुंच जांच के आदेश किए। सिटी मजिस्ट्रेट आपूर्ति विभाग से सदर निरीक्षक तरमीम अहमद, जितेंद्र कुमार, आईओसी के सेल्स आफीसर पारितोष कोतवाल के साथ बदायूं डिपो के डीजल पंप पर पहुचें। सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया डीजल में पानी पाया है। बसों के टैंक और पंप के टैंक से डीजल निकालकर आईओसी के अधिकारी ने नमूने लिए।
चालकों के भी लिए गए बयान
सिटी मजिस्ट्रेट ने चालक राज कुमार और रमेशपाल सिंह के बयान लिए। वहीं पंप से डीजल देने पर रोक लगा दी। इस मौके पर आरएम जेपी सिंह, पंप इंचार्ज मनोहर लाल, बुकिंग क्लर्क केपी सिंह, लेखराज आदि अन्य डिपो के अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हो गए।
यात्रियों को हुई परेशानी
बदायूं डिपो के पंप पर मिलावटी डीजल को लेकर अफरा तफरी का माहौल रहा। उन गाड़ियों से डीजल निकलवाया गया, जिनमें डीजल डाल दिया गया था। इससे कई बसें प्रभावित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बसें फेल होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
एआरएम बदायूं डिपो जेपी सिंह ने बताया कि डीजल टैंक में डीजल में पानी की मिलावट का मामला उजागर हुआ है। पंप के टैंक में कैसे पानी पहुंचा। इसकी वजह मालूम होगी। आईओसी के अधिकारियों को भी देखना चाहिए। टैंक आदि के रखरखाव का जिम्मा इन्हीं पर होता है। मिलावटी डीजल की वजह से डिपो के सामने कठिनाइयां आईं।