बदायूं जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। कादरचौक स्थित राधिका नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान कथित तौर पर प्रसूता के सीने पर बैठकर जबरन डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जिससे नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्री मोहन झा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नर्सिंग होम को सील करने के आदेश दिए हैं, साथ ही कादरचौक सीएचसी के प्रभारी (एमओआईसी) को हटाकर ककराला स्थानांतरित कर दिया गया है।
सीएचसी से निजी नर्सिंग होम भेजी गई प्रसूता
कादरचौक थाना क्षेत्र के ग्राम ललसी नगला निवासी छोटेलाल पुत्र रामखिलाड़ी ने बताया कि उनकी पत्नी कृष्णा को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार सुबह करीब 7 बजे 108 एंबुलेंस से सीएचसी कादरचौक में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि वहां तैनात एएनएम शशिलता और दाई बबीता ने एमओआईसी से बात कर उन्हें एक निजी नर्सिंग होम भेज दिया। परिजनों का कहना है कि नर्सिंग होम पहुंचने पर उन्हें डरा-धमकाकर 15 हजार रुपये जमा कराए गए और जच्चा-बच्चा की पूरी जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिया गया।
प्रसूता के सीने पर बैठकर कराया प्रसव, नवजात की मौत
परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि प्रसव के दौरान नर्सिंग होम की एक महिला ने प्रसूता के सीने पर बैठकर पेट को जोर से दबाया, ताकि बच्चा जल्दी बाहर निकले। इस अमानवीय और असुरक्षित तरीके के चलते नवजात की हालत बिगड़ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जब परिजनों ने इसका विरोध किया तो स्टाफ द्वारा उन्हें धमकाया गया। आरोप है कि कहा गया ज्यादा मत बोलो, नहीं तो पत्नी को भी नुकसान पहुंचा देंगे।
उचित इलाज और रेफर न करने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि नवजात की हालत बिगड़ने के बावजूद न तो समय पर उचित इलाज दिया गया और न ही किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो बच्चे की जान बच सकती थी।
जांच में मिलीं कई अनियमितताएं, नर्सिंग होम सील
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम और सीओ उझानी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम का निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि अस्पताल में न तो पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं थीं और न ही प्रशिक्षित डॉक्टर मौजूद थे। आवश्यक लाइसेंस और मानकों का भी अभाव मिला। इसके बाद नर्सिंग होम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
सीएमओ डॉ. मोहन झा ने बताया कि संबंधित नर्सिंग होम पंजीकृत जरूर था, लेकिन वहां कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था और मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कादरचौक के एमओआईसी डॉ. अवधेश कुमार राठौर को तत्काल प्रभाव से हटाकर ककराला भेज दिया गया है, जबकि ककराला के प्रभारी को कादरचौक में तैनात किया गया है।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव, जांच जारी
पुलिस ने छोटेलाल की तहरीर के आधार पर नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पूरे मामले की जांच जारी है। शिव जाने सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में डीएम के निर्देश पर एसडीएम और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में टीम जांच कर रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और रिपोर्ट भी दर्ज होगी।