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यूपी चुनाव 2022: बदायूं-दातागंज और बिसौली में आमने-सामने के मुकाबले, बाकी जगह हाथी भी झूमा, फूल और साइकिल की जबर्दस्त टक्कर

Tue, 15 Feb 2022 02:39 AM IST
बरेली ब्यूरो अमित सक्सेना, अमर उजाला, बदायूं

सार

शहर में पोलिंग बूथों पर हमने जायजा लिया तो बूथों के बाहर की मंडली से चुनावी हवा का पता लगा। बताया गया कि फूल और साइकिल में जोरदार टक्कर हुई है। सुबह से दोपहर तक साइकिल शहर में हावी दिखी पर बाद में फूल के खिलने की बात जानकार मान रहे हैं।
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भाजपा, सपा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं में चुनाव के बीच मतदान के दौरान बूथों पर भले ही लोगों के मन की बात न खुल सकी पर कस्बों में चाय की दुकानों और नुक्कड़ों पर हो रही चर्चाओं में सियासी आंकड़ा काफी हद तक साफ होता नजर आया। बूथों के आसपास सजी चौपालों में भी प्रत्याशियों का दम और चुनावी हवा का शोर बदस्तूर सुनाई दिया। बतकही से उस विधानसभा ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों की सियासी हवा का भी पता चला। फूल और साइकिल की जबर्दस्त टक्कर की स्थिति तीन विधानसभा क्षेत्रों में बताई जा रही है।

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शहर में भाजपा-सपा की भिड़ंत, बसपा पिछड़ी
शहर में पोलिंग बूथों पर हमने जायजा लिया तो बूथों के बाहर की मंडली से चुनावी हवा का पता लगा। बताया गया कि फूल और साइकिल में जोरदार टक्कर हुई है। सुबह से दोपहर तक साइकिल शहर में हावी दिखी पर बाद में फूल के खिलने की बात जानकार मान रहे हैं। हाथी की चाल यहां ज्यादा खास नहीं रही। कई जानकार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भाजपा के यहां मैदान मारने के आसार बन रहे हैं। भाजपा खेमे में खुशी का आलम भी यही स्थिति बता रहा है।

शेखूपुर में त्रिकोणीय संघर्ष से भाजपा की डगर आसान
शेखूपुर में त्रिकोणीय संघर्ष के बीच फूल खिलने का जिक्र चल रहा है। यहां शुरू में भाजपा और सपा की जोरदार टक्कर के आसार बने थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की शहर के पास हुई जनसभा से भी प्रत्याशी हिमांशु यादव की स्थिति मजबूत आंकी जा रही थी। बावजूद खबर आई कि मुस्लिम वोट काफी हद तक बसपा में खिसक गया और कैडर वोट से मुस्लिम खां मजबूत हुए। ऐसे में भाजपा के लिए भी डगर आसान बताई जा रही है।
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दातागंज में बसपा पिछड़ी, सपा-बसपा में रोमांचक मुकाबला
दातागंज में फूल और साइकिल की जोरदार भिड़ंत की चर्चा है। कुछ दिन से जो स्थिति थी वह चतुष्कोणीय मानी जा रही थी। बसपा के रचित गुप्ता व कांग्रेस के प्रत्याशी किसान नेता आतिफ खां भी मजबूत माने जा रहे थे। हालांकि, दो से तीन दिन में यहां स्थिति में बदलाव बताया जा रहा है, जिसमें मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा में हो गया। चर्चा यह भी है कि शाक्य वोट भी काफी संख्या में सपा की झोली में गया है। यहां कांटे की टक्कर बताई जा रही है।

बिल्सी में गठबंधन की हवा निकलने का शोर
बिल्सी में मुख्य लड़ाई से सपा व महान दल प्रत्याशी के बाहर जाने की चर्चा भी लोगों की जुबान पर है। बताया जा रहा है कि वहां भाजपा सबसे मजबूत है और बसपा की प्रत्याशी का भाजपा से सीधा मुकाबला है। यहां चर्चा है कि रापद प्रत्याशी भी भाजपा का ठाकुर वोट काटने में कुछ कामयाब हुए हैं पर मुख्य लड़ाई से बाहर हैं। बसपा यहां चमत्कार भी कर सकती है।

सहसवान में हाथी की चाल सबसे तेज
सहसवान में मुख्य लड़ाई सपा और बसपा की बताई जा रही है। यहां जिले भर में बसपा का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। कस्बों से गांव तक लोगों ने बसपा को वोट दिया है। डीपी यादव फैक्टर भी खूब चला है। उनके बेटे रापद प्रत्याशी कुणाल यादव ने यादव व भाजपा के सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाई है। यह नुकसान ज्यादा हुआ तो साइकिल को दिक्कत हो सकती है। भाजपा की हालत यहां सबसे पतली बताई जा रही है।

बिसौली में भाजपा और सपा का रोमांचक मुकाबला
बिसौली सुरक्षित सीट पर सपा और भाजपा का आमने सामने जोरदार मुकाबला चर्चा में है। कुछ दिन पहले तक बसपा का यहां प्रभाव माना जा रहा था। कांग्रेस भी महिला प्रत्याशी के साथ जीत का दम भर रही थी। हालांकि चुनावी माहौल में इन दोनों पार्टियों से किसी करिश्मे की उम्मीद बेमानी ही होगा। भाजपा प्रत्याशी को पहले से मजबूत माना जा रहा था पर सपा ने सवर्ण वोट बैंक से लेकर बसपा के कैडर वोट में भी सेंध लगाई है।

सहसवान और शेखूपुर में चल गया आबिद फैक्टर
सपा विरोधी मुहिम के अगुवा बने वक्फ विकास निगम के पूर्व चेयरमैन आबिद रजा शहर से टिकट न मिलने के बाद से भड़के हुए थे। वह सपा को नई सपा बताकर विरोध कर रहे थे और हर क्षेत्र में अलग प्रत्याशी के पक्ष में अपना समर्थन दे रहे थे। सहसवान और शेखूपुर में उन्होंने खुलकर बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में सभाएं कीं और खासकर मुस्लिम समाज से सपा को वोट न देने की अपील की। बताया जा रहा है कि दोनों ही जगह बसपा प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में हैं और सपा को मुस्लिम समाज के वोटों का काफी नुकसान हुआ है। हालांकि असली नतीजा 10 मार्च को पता लगेगा पर चुनावी चर्चा की मानें तो स्थिति काफी हद तक साफ हो चुकी है।

कांग्रेस की हालत और खराब होने का संकेत
जिले में कांग्रेस लंबे समय से राजनीतिक रसातल में है। यहां पार्टी का कोई विधायक 1985 से नहीं जीता है। हर बार की तरह इस बार भी पार्टी प्रियंका गांधी के नारों और जोशीले भाषणों व संगठन के दम पर जीत का दंभ भर रही थी। बताते हैं कि इस बार का विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस के लिए बेहद निराशाजनक रहा है। चुनावी नतीजों में स्थिति पहले से भी खराब होने का अनुमान जानकार लगा रहे हैं।

चौपाल में वोटरों ने बताई सियासी हवा किधर से किधर बह गई
दातागंज के गांव अंधरऊ में पोलिंग बूथ के पास एक चौपाल सजी थी। इसमें बैठे लोग अमर उजाला अखबार पढ़ने के साथ ही राजनैतिक चर्चा में मशगूल थे। हमें देखकर इन लोगों ने अपनी बात बंद कर दी। बाद में बातचीत में कुछ खुले भी तो इनमें से श्रीपाल ने कहा कि उनके इलाके में फूल और साइकिल की लड़ाई है। वैसे दूसरी पार्टियों को भी वोट पड़ रहे थे पर दो दिन से हवा बदल गई। जगदीश ने कहा कि कुछ दिन पहले तक पंजा भी दमदारी से मैदान में था पर आज का हाल अच्छा नहीं है।
सहसवान के भूड़ इलाके के गांव रफतपुर मौरूशुमाली में भी प्राइमरी स्कूल के बाहर चबूतरे पर ग्रामीणों की चौपाल सजी थी। इसमें अधिकांश चौर पर यादव तो कुछ जाटव व मुस्लिम लोग शामिल थे। गांव निवासी पोशाकी जिक्र कर रहे थे कि सहसवान से साइकिल निकल जाएगी पर सूबे में फूल की सरकार ही आनी है। इसलिए किसी को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। होगा वही जो बाबाजी चाहेंगे। इस पर तस्लीम ने प्रतिवाद किया। कहा कि सहसवान में हाथी ने सबको रौंद दिया है।

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