उझानी (बदायूं)। राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान, प्रसव और सर्वे आदि का इंसेंटिव नहीं मिलने पर आशाओं और संगनियों ने चिकित्साधीक्षक पर भुगतान नहीं कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बृहस्पतिवार को बैठक के दौरान उन्होंने अपने हक की आवाज उठाई तो चिकित्साधीक्षक उठकर चले गए। आशाओं और चिकित्साधीक्षक के बीच नोकझोंक भी हो गई। इसे लेकर आशाओं ने मुख्य चिकित्साधिकारी से शिकायत की है।
आशाओं ने सामूहिक रूप से सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह को भेजे शिकायती पत्र में चिकित्साधीक्षक पर बेवजह दबाव बनाने का आरोप लगाया है। आशाओं और संगनियों ने कहा है कि दिसंबर महीना समाप्त होने के कगार पर है, लेकिन अस्पताल से उन्हें नवंबर महीना के इंसेंटिव का भुगतान नहीं किया गया है। इंसेेंटिव उन्हें टीकाकरण, सर्वे और प्रसव कराने पर मिलता है। बृहस्पतिवार को अस्पताल परिसर में बैठक के दौरान आशाओं ने इंसेंटिव को लेकर चिकित्साधीक्षक से बात की तो वह झल्ला पड़े। आरोप है कि चिकित्साधीक्षक ने आशाओं से कहा कि वह बीपीएम और बीसीपीएम की शिकायत करें लेकिन आशाओं ने ऐसा करने से इंकार कर दिया तो चिकित्साधीक्षक बैठक से उठकर चले गए। इसे लेकर आशाओें और चिकित्साधीक्षक के बीच नोकझोंक भी हो गई। इससे गुस्साई आशाओं ने भुगतान नहीं होने पर सघन इंद्रधनुष और आशाओं से जुड़े सरकारी कार्यक्रम के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
आशाओं ने डीपीएम के सामने भी रखा पक्ष
उझानी। इंसेंटिव को लेकर आशाओं के गुस्से की भनक लगते ही बैठक के बाद बदायूं से डीपीएम कमलेश शर्मा भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। आशाओं ने उन्हें अपनी शिकायत से अवगत कराया। डीपीएम ने आशाओं से बात कर उन्हें इंसेंटिव का भुगतान कराने के लिए चिकित्साधीक्षक से बात करने का भरोसा दिलाया।
उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी आशाओं की शिकायत को लेकर पूरा मामला मेरे संज्ञान में आ चुका है। पूरे मामले की जांच अफसरों की कमेटी से कराएंगे। जांच में जो भी सामने आया, उसके अनुरूप कार्रवाई भी करेंगे।
- डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ।