उझानी (बदायूं)। इंसेंटिव भुगतान को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक और आशाओं के बीच विवाद की जांच रिपोर्ट चार दिन पहले सीएमओ कार्यालय पहुंच गई है। डीएम कुमार प्रशांत के आदेश पर एडीएम (वित्त) के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने पिछले दिनों यहां पहुंचकर जांच की थी। जांच में अफसरों ने पूरे मामले को रुपयों के लेनदेन से जुड़ा माना था। इसके बाद अधीक्षक समेत चार कर्मियों पर कार्रवाई के आसार बने हुए हैं।
एडीएम (वित्त) नरेंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य, एसीएमओ अनिल शर्मा और डीपीएम कमलेश शर्मा ने 28 दिसंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच की थी। जांच के दौरान आशाओं और चिकित्साधीक्षक के बीच आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चला लेकिन अगले दिन ही जब आशाओं के फिर से वीडियो बयान वायरल हुए तो मामला पेचीदा होता चला गया। अगले दिन ही जांच टीम के अफसरों ने अपनी रिपोर्ट से डीएम कुमार प्रशांत को अवगत करा दिया था। जांच रिपोर्ट चार दिन पहले सीएमओ कार्यालय पहुंची। अगले दिन सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह विभागीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए लखनऊ में थे, सो जांच रिपोर्ट अभी तक सीएमओ कार्यालय में है। सूत्रों की मानें तो जांच अफसरों ने चिकित्साधीक्षक समेत चार कर्मियों को विवाद में दोषी माना है। वजह भी रुपयों के लेनदेन की बताई जा रही है। चिकित्साधीक्षक के अलावा जिन कर्मियों पर गाज गिरना तय बताया जा रहा है, उनमें तीन संविदा पर तैनात हैं। इनका ताल्लुक भी आशाओं के इंसेंटिव भुगतान से रहता है।
बीपीएम के आरोपों से उड़ी अफसरों की नींद
उझानी। आशाओं के इंसेंटिव भुगतान को लेकर जो विवाद बढ़ा, उसके पीछे की हकीकत अगर सीएमओ कार्यालय पहुंचे बीपीएम के लेटर के अनुरूप मानी जाए तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आशाओं के इंसेंटिव भुगतान रिलीज क्यों नहीं हुए, इसके पीछे चिकित्साधीक्षक की मंशा क्या थी। जिक्र तो लेटर में इस बात का भी है कि उन्हें बुलाकर द्विअर्थी बातें की जाती थीं। लेटर में आरोप तो और भी गंभीर हैं लेकिन फिलहाल उस पर जांच शुरू नहीं हुई है। फिलहाल, सेहत महकमे के अफसर इसे लेकर ज्यादा परेशान हैं।
बृहस्पतिवार को सार्वजनिक अवकाश होने की वजह से जांच रिपोर्ट का अध्ययन नहीं कर पाए हैं। कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी। बीपीएम ने अपने लेटर में चिकित्साधीक्षक पर क्या आरोप लगाए हैं, यह भी शुक्रवार को लेटर देखने के बाद पता लेगा।
- डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ।