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जांच अफसरों ने शुरू किया अभिलेखों का परीक्षण, डीएम को आज सौंप सकते हैं रिपोर्ट

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उझानी (बदायूं)। चिकित्साधीक्षक महेश प्रताप सिंह और आशाओं के बीच विवाद के मामले में नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। एक दिन पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जब्त अभिलेखों का रविवार को भी अफसरों की टीम ने परीक्षण किया। अभी हालांकि कुछ तय नहीं हो पाया है लेकिन सब कुछ ठीक रहा तो सोमवार को एडीएम (वित्त) नरेंद्र बहादुर सिंह की अगुआई वाली चार सदस्यीय टीम डीएम कुमार प्रशांत को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक पर आशाओं से लगे रुपयों की डिमांड और उन्हें अकेले में बात करने के आरोपों को लेकर डीएम कुमार प्रशांत ने तीन दिन पहले एडीएम (वित्त) नरेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य, एसीएमओ अनिल शर्मा और डीपीएम कमलेश शर्मा की कमेटी को शिकायतों की जांच करने का आदेश दिया था। शनिवार को जांच अफसरों ने अस्पताल पहुंचकर आशाओें समेत संगनियों और स्वास्थ्य कर्मियों के बयान भी दर्ज किए। अफसरों ने अस्पताल से जो अभिलेख जब्त किए, उनके परीक्षण का दौर रविवार को भी चला। आशाओं के गुस्से के मद्देनजर अफसर भी हर पहलू पर बारीकी से गौर कर रहे हैं। आशाओं ने तो मौके पर जांच के दौरान ही अपने गुस्से का इजहार कर दिया था। इस विवाद में आशाओं से जुड़े बीपीएम सेंटर को लेकर भी अफसरों ने गौर किया है।
सूत्रों की मानें तो अफसरों ने अब तक जांच में दोनों पक्ष को दोषी माना है। दोष किस पक्ष का ज्यादा है और किसका कम, यह तो अफसरों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पता लगेगा, लेकिन जांच की रफ्तार से तो यह नजर आ रहा है कि सोमवार को डीएम कुमार प्रशांत को जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। अगर दोनों पक्ष बराबर के दोषी निकले तो चिकित्साधीक्षक और बीपीएम पर कार्रवाई हो सकती है। बीपीएम यूनिट में शामिल कर्मियों पर भी गाज गिर सकती है। बता दें कि बृहस्पतिवार को आशाओं की मीटिंग के दौरान ही इंसेंटिव को लेकर आशाओं और चिकित्साधीक्षक के बीच नोकझोंक हो गई थी।
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पहले विवाद फिर कोतवाली में दर्ज हुए समझौता पत्र
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उथलपुथल कोई चार-छह दिन से नहीं बल्कि महीनों से चल रही है। दो बार तो मामले कोतवाली भी पहुंचे। चिकित्साधीक्षक, विशाल माहेश्वरी और संजीव कुमार उर्फ रंशू सक्सेना के मामलों में तो अफसरों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था। विशाल का पहले फिर अंशू के मामले में समझौता दाखिल हुआ। अंशू ने अस्पताल परिसर मेें निर्माण कार्य, चिकित्साधीक्षक की पोस्टिंग को लेकर सीएम के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर दी थी। जिसके निस्तारण पर सवाल उठे तो ऐतराज कर दिया गया। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि अंशू और चिकित्साधीक्षक के मामले में दो दिन पहले ही समझौता पत्र प्राप्त हुआ है।
जांच चल रही है। हर बिंदु पर गौर किया जा रहा है। जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट डीएम के समक्ष प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होनी है। दोषी जो भी निकला, वह बख्शा नहीं जाएगा।
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- नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम (वित्त)।
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