बदायूं। एक महिला से दुष्कर्म के मामले में फंसे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के सचिव/महाप्रबंधक को बर्खास्त होने और दस साल की सजा होने के बावजूद फिर से तैनाती मिल गई। महाप्रबंधक करीब छह साल जेल में भी रहे। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की और जमानत अर्जी के आधार पर रिहाई मिल गई। इसके बाद साठगांठ करके उन्होंने वही कुर्सी फिर से हथिया ली। इसकी कुछ अधिवक्ताओं ने सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक से शिकायत की, जिस पर अब इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
आवास विकास कॉलोनी निवासी संजय कुमार सिंह उर्फ संजय चौधरी वर्ष 2012-13 में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के सचिव/महाप्रबंधक थे। उस समय बैंक में एक महिला का आना जाना था। उसने संजय चौधरी के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। 27 मई 2013 को पुलिस ने संजय चौधरी को जेल भेज दिया। उसके बाद एक-एक करके उन पर कई मुकद्दमे दर्ज हुए। 15 मार्च 2016 को न्यायालय से उनको दस साल की सजा और 20 हजार रुपये का जुर्माना हुआ। इस दौरान अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की समिति ने एक प्रस्ताव बनाकर उन्हें बर्खास्त करते हुए एक पत्र संयुक्त आयुक्त सहकारिता बरेली मंडल बरेली को भेजा था। उसमें उनके खिलाफ लगी धाराओं का भी उल्लेख किया गया। सूत्रों की माने तो संजय चौधरी ने सजा होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की। जेल में उन्हें करीब छह साल हो चुके थे। उनके आवेदन पर न्यायालय ने जमानत मंजूर कर ली, जिससे 28 मार्च 2019 को उनको रिहाई मिल गई। बाद में उन्होंने समिति में अपनी जगह बना ली और साठगांठ करके फिर से नौकरी ले ली। तब से अब तक वह धड़ल्ले से नौकरी कर रहे हैं। इसकी शिकायत अधिवक्ता गजेंद्र सिंह समेत सुदेश सिंह चौहान, ओमकार सिंह यादव ने सहायक आयुक्त और सहायक निबंधक को पत्र भेजकर की, जिसके बाद एआर कोऑपरेटिव राघवेंद्र सिंह ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है
- जिस समय संजय चौधरी जेल में थे, तब डीएम ने अचानक जेल का निरीक्षण किया था। तलाशी के दौरान संजय चौधरी के पास जेल में एक मोबाइल मिला था। इस संबंध में एक एफआईआर भी दर्ज हुई थी।
- संजय चौधरी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिससे उनको जमानत मिल गई। वह समिति के पास आए थे। इस संबंध में अधिवक्ता से राय ली गई, तब कहीं उन्हें दोबारा तैनात किया गया है। बाकी जानकारी मैं फाइल देखकर ही बता सकती हूं।
- रेखा शाक्य, सभापति, अर्बन कोऑपरेटिव बैंक
मुझे तो समिति ने नौकरी पर रखा है। इसके लिए सेक्शन 11 के तहत प्रावधान भी है, जिससे कोई व्यक्ति अपील करता है और उसे जमानत मिल जाती है तो वह नौकरी पर जा सकता है। फिर मैंने तो अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में अच्छा कार्य किया है। वह मेरा निजी मामला था। जब से मैं यहां आया हूं, तब से कई घोटालों का खुलासा किया है। इससे कुछ विरोधी सक्रिय हो गए हैं, जिसके चलते यह शिकायतें कराई जा रही हैं।
- संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक
-संजय चौधरी का मामला मेरे समय का नहीं है। फिलहाल अभी मेरे पास शिकायत आई है, जिस पर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- राघवेंद्र सिंह, एएआर कोऑपरेटिव