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बदायूं की कशिश ने ओडिशा में लगाया कांस्य पर निशाना

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बदायूं। मेरे हौसलों में अभी जान बाकी है। ये तो दौड़ भर है, अभी उड़ान बाकी है.. मेरे सादगी से मेरे बारे में अंदाजा मत लगाना। ये तो शुरुआत है अंजाम अभी बाकी है। यह शायरी ऊझानी के बहादुरगंज मोहल्ले की रहने वाली बसीक खान की बेटी कशिश खान पर सही बैठती है। तीरंदाजी की खास शौकीन रही कशिश ने ओडिशा में हुई खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कांस्य पदक हासिल कर देश में बदायूं का नाम रोशन किया है।
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ओडिशा के भुवनेश्वर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। 22 फरवरी से यहां पर तीरंदाजी, ऐथलेटिक्स, मुक्केबाजी, तलवारबाजी, जूडो, तैराकी, भारोत्तोलन, कबड्डी सहित 17 खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं जो एक मार्च तक चलेंगी। यहां पर कशिश खान ने बुधवार को तीरंदाजी में कांस्य पदक प्राप्त किया। अब उनका लक्ष्य एशिया कप में खेलना है।
इससे पहले कशिश खान ने 2018 में मथुरा में हुई तीरंदाजी सीनियर यूपी स्टेट प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया। उसके बाद 2018 में ही महाराष्ट्र के पुणे में हुई सीनियर ओपन तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। इसमें उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर बदायूं जिले का नाम रोशन किया था। हाल ही में 13 फरवरी को हरियाणा के सोनीपत में एशिया कप के ट्रायल का आयोजन हुआ था। इसमें कशिश खान ने ऑल इंडिया रैकिंग में पांचवां स्थान प्राप्त किया। वह केवल ढाई अंक से एशिया कप में चयन होने से रह गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। कशिश ने बताया कि गूंज संस्था के माध्यम से उसने तीरंदाजी के गुर सीखे। संस्था की तरफ से ही उसे कोच उपलब्ध कराए गए, जिससे वह आज इस मुकाम तक पहुंची है।
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मां ने जताया गूंज संस्था का आभार
कशिश की मां तबस्सुम बी ने बताया कि कशिश खान उनकी सबसे छोटी बेटी है। बड़ी बेटी अदीबा खान, अनमता खान और बेटा फैसल खान है। कशिश के पिता बसीक खान 2010 में दिल्ली चले गए थे। वहां पर प्राइवेट जॉब कर रहे हैं। वहां से वह पैसे भेजते हैं। ऐसे में उन्होंने अकेले ही बच्चों को पाला है, लेकिन कभी बच्चों के मन को नहीं मारा। उन्होंने बताया कि कशिश का मन शुरू से खेलों के प्रति ज्यादा रहा, उन्होंने उसे कभी खेलने से नहीं रोका। तीरंदाजी का शुरू से ही उसे शौक रहा और वह लगातार प्रयास करती रही जिसका नतीजा आज सबके सामने है। इस सबके बीच तबस्सुम गूंज संस्था का नाम लेना भी नहीं भूलीं जिसने समय समय पर कशिश को कोच उपलब्ध कराए, जिन्होंने उसे तीरंदाजी की ट्रेनिंग दी।
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