बदायूं। एनएसएस इकाई की छात्राओं ने गांवों में बच्चों को पढ़ाकर यह साबित कर दिया है कि जब दिल में जज्बा और हौसला हो तो मंजिल मिल ही जाती है। गांव के बच्चे, जो ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें पढ़ाकर ये स्वयं सेविकाएं एक मिसाल कायम कर रही हैं।
गिंदो देवी महिला महाविद्यालय की एनएसएस इकाई की छात्राएं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सरला देवी चक्रवर्ती के निर्देशन में गांवों में जाकर शिक्षा की अलख जगा रही हैं। कोरोना काल के दौरान स्कूल कॉलेज बंद जरूर हैं लेकिन इन छात्राओं ने बच्चों के शैक्षिक स्तर को बनाए रखने का जिम्मा उठाया है। मोहम्मद नगर की संघमित्रा, कादरचौक की रूबी गुप्ता, मोहम्मद नगर सुलरा की किरन, भजपुरा की पूजा समेत कई छात्राएं गांव में छोटे बच्चों को कोचिंग दे रही हैं। गांव में शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं। इस दौरान कोरोना से बचाव संबंधी नियमों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अभियान से जुड़ी छात्राओं का कहना है कि शिक्षित महिलाओं को भी इस अभियान में शामिल होकर इसे आगे बढ़ाना चाहिए। डॉ. सरला देवी चक्रवर्ती का कहना है कि गांवों में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा सभी बच्चों के पास नहीं है। ऐसे में छात्राओं का यह अभियान काफी अहम है।
कहते हैं कि ज्ञान बांटने से ज्ञान बढ़ता है। कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद हैं। छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो ऐसा कुछ करने का विचार आया। इसके बाद गांव में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चों के शैक्षिक स्तर में इससे सुधार हो रहा है।
- संघमित्रा, बीए द्वितीय वर्ष
स्कूल-कॉलेज बंद हैं। हम छात्राएं अपने गांवों में ही छोटे बच्चों को मुफ्त कोचिंग दे रही हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत यह भी एक सेवा है। इससे शिक्षा के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता भी बढ़ रही है। घर पर रहते हुए ही बच्चे काफी कुछ सीख रहे हैं।
- रूबी गुप्ता, बीए तृतीय वर्ष
कई स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं। गांवों में सभी बच्चों के पास स्मार्ट फोन की सुविधा नहीं है। ऐसे बच्चों को पूरा फायदा हो रहा है। उनका शैक्षिक स्तर नहीं गिर रहा, बल्कि वह लगातार आगे की पढ़ाई करते हुए अपना कोर्स पूरा कर रहे हैं।
- पूजा, बीए द्वितीय वर्ष
कई गांव अब भी शिक्षा के मामले में पिछड़े हुए हैं। कोरोना से व्यवस्थाएं और भी प्रभावित हुई हैं। छात्राएं अपने गांवों में छोटे बच्चों को पढ़ाकर सुधार कर रही हैं। स्कूल-कॉलेज खुलने पर छोटी कक्षाओं के बच्चों को इसका पूरा फायदा मिलेगा।
- किरन, बीए तृतीय वर्ष