पंजीकरण के नाम पर डॉक्टरों से अवैध वसूली के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) में शुरू हुई अंर्तकलह की गाज आखिर आईएमए अध्यक्ष पर पड़ी। उनको पद से हटा दिया गया है। अब यह जिम्मेदारी डॉ. सुरेश चंद्र नौगरिया को सौंपी गई है। इधर, आईएमए अध्यक्ष डॉ. मुकेश जौहरी का दावा है कि उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन पर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह बेबुनियाद हैं।
पिछले दिनों नर्सिंग होम के पंजीकरण के नाम पर जिले भर में डॉक्टरों से वसूली हुई थी। मामला शहर विधायक/वक्फ विकास निगम के चेयरमैन आबिद रजा तक पहुंचा। उन्होंने वसूल की गई रकम डॉक्टरों को वापस दिलाई थी। डॉक्टरों ने भी ये रकम खुद न लेकर भूकंप पीड़ितों को भेज दी थी। इसके बाद से ही आईएमए अध्यक्ष के खिलाफ विरोध के स्वर फूट रहे थे। आईएमए सदस्यों और पदाधिकारियों ने प्रांतीय नेतृत्व से आईएमए अध्यक्ष डॉ. मुकेश जौहरी को पद से हटाने की मांग की थी।
प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश आईएमए कार्यकारिणी का पुन: चुनाव कराया गया। इसमें डॉ. जौहरी के समर्थन में सिर्फ सात वोट पड़े। उनके प्रतिद्वंदी डॉ. सुरेश नौगरिया को 22 डॉक्टरों ने ने वोट दिए। चुनाव अधिकारी डॉ. संजीव गुप्ता और डॉ. सीके जैन की देखरेख में चुनाव संपन्न हुआ। डॉ. इत्तेहाद आलम सचिव पद पर कायम रहे। डॉ. हबीब अहमद को चौथी बार उपाध्यक्ष चुनाव गया। डॉ. केके वर्मा को संयुक्त सचिव, डॉ. आदित्य हरि गुप्ता को कोषाध्यक्ष और डॉ. पारुल गुप्ता को सांस्कृतिक सचिव चुना गया।
सीएमओ से दोस्ती का भुगता खामियाजा
बदायूं। डॉ. मुकेश जौहरी और सीएमओ डॉ. दीपक सक्सेना की दोस्ती जगजाहिर है। डॉ. सक्सेना पहले भी लंबे समय तक बदायूं जिला अस्पताल में तैनात रहे हैं। जिले में नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन शुरू होने से पहले एक मीटिंग डॉ. जौहरी के आवास पर हुई थी। इसमें सीएमओ डॉ. सक्सेना और एसीएमओ डॉ. बीपी सिंह भी मौजूद थे। इसके साथ डॉ. जौहरी का विरोध भी शुरू हो गया था।
मुझे पद से नहीं हटाया गया है, मैनें खुद की इस्तीफा दिया है। आईएमए के सदस्य अगर मुझ पर संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं तो यह गलत है। -डॉ. मुकेश जौहरी, पूर्व अध्यक्ष आईएमए
पूरी कार्रवाई प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशन में हुई है। यह सब जानते हैं कि डॉक्टरों का शोषण हो रहा था। मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना। जनरल बॉडी और प्रांतीय नेतृत्व का निर्णय मुझे मान्य है। -डॉ. इत्तेहाद आलम, सचिव आईएमए