जिले में बुखार से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले दिनों अलापुर के गांव उपरैला, उघैती के गांव करनपुर और मेवली में बुखार से 22 मौतें हो चुकी हैं। ये बुखार मूसाझाग तक पहुंच चुका है। यहां के मल्हापुर गांव में पांच साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि गांव में एक दर्जन से ज्यादा लोग बीमार है। इतने खतरनाक हालात पर भी स्वास्थ्य महकमा नहीं जागा है।
मल्लापुर गांव में एक सप्ताह पहले बुखार फैलना शुरू हुआ था। धीरे-धीरे बुखार ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों को अपनी जद में ले लिया। सोमवार को गांव के अनिल यादव के बेटे अभि (5) की बुखार से मौत हो गई। गांव के पुष्पेंद्र, शीलेंद्र, सुशील, सुनील, सोमेंद्र, अनिकेत, दीपक, गौरव, रामबाबू, प्यारे, लालाराम, रामू, पिंकू का इलाज चल रहा है।
मलेरिया से हो रही मौत
बदायूं। उपरैला में पिछले दिनों बुखार से सात लोगों की मौत से सब सख्ते में हैं। पिछले दिनों डायरेक्टर पैरा मेडिकल डॉ. एसएन राय और सहायक निदेशक पैरा मेडिकल डॉ. वीके सिंह ने उपरैला पहुंच कर हालात का जायजा लिया। बीमार लोगों की स्लाइड जांच पीजीआई में हुई, जिसमें मलेरिया की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकार किया है कि जिले में मलेरिया का प्रकोप है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए फिलहाल विभाग की ओर से कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं।
वर्जन-
बुखार से मौत की मुझे कोई जानकारी नहीं है, मंगलवार को टीम भेजकर जांच कराऊंगा। इससे पहले मल्हापुर गांव में बुखार पीड़ितों की जानकारी मिली थी। जिसपर बीते शनिवार एक टीम भेजकर दवाएं बंटवाई गई।
-डॉ. आरडी तिवारी, सीएमओ