बदायूं। जहां एक ओर कोरोना वायरस लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया है। उनका आरोप है कि सरकार ने प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मचारी को बीमा और कोरोना से बचाव के साधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन विभाग उन्हें प्राइवेट कर्मचारी बता रहा है। यह उनके साथ अन्याय है। अगर उनके साथ न्याय नहीं किया गया तो कर्मचारी एंबुलेंस छोड़कर अपने-अपने घर चले जाएंगे।
एंबुलेंस कर्मचारियों ने मंगलवार दोपहर से कार्य बहिष्कार कर दिया। उन्होंने महिला अस्पताल में प्रदर्शन करते हुए कहा कि सरकार ने अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का 50 हजार तक का बीमा कराने और उन्हें कोरोना से बचाने के साधन उपलब्ध कराए हैं। जबकि एंबुलेंस 24 घंटे मरीजों को लाने ले जाने में लगी रहती हैं। एंबुलेंस कर्मचारी दिन रात काम करते हैं। फिर चाहे मरीज घायल हो गया, गर्भवती महिला या फिर कोरोना से पॉजिटिव मरीज क्यों न हो। आज कोरोना जैसी महामारी फैली हुई है। इसके बावजूद किसी एंबुलेंस में कोई मास्क, ग्लब्स, हैंड वॉस, सैनिटाइजर, पीपीई किट जैसी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि हमारे प्रदेश मीडिया प्रभारी ने स्वास्थ्य मंत्री से बात की थी। जिस पर उन्होंने बताया कि वह प्राइवेट कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि जब हम लोग प्राइवेट कर्मचारी हैं तो हमें प्राइवेट कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। तीन महीने की छुट्टी, वेतन, पीएफ का डबल पैसा देना चाहिए। जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की सभी सुविधाएं मिलेंगी, तभी एंबुलेंस कर्मचारी कार्य पर लौट आएंगे। इस दौरान राजाराम यादव, शिवम कुमार, राजीव कुमार यादव, भूरे सिंह, गौरव, खड़ग सिंह, अखिलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
एंबुलेंस चालकों की जो तीन मांगें थीं, वह मान ली गई हैं। सैनिटाइजर और मास्क आदि पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। फिलहाल बदायूं जिले में हड़ताल नहीं है। एंबुलेंस के पदाधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। - कुमार प्रशांत, डीएम