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दागी पीसीएफ को भी दे दी जिम्मेदारी!

Tue, 21 Apr 2015 08:01 PM IST
badaun
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उप्र कोऑपरेटिव फे डरेशन (पीसीएफ) इस साल दागी बन गया। करोड़ों के बीज और खाद घोटाले में इस संस्था के दाग लगे हैं। यही नहीं इस वर्ष का बीज घोटाला सबसे बड़ा घोटाला है। इसमें पीसीएफ के जिला कार्यालय का तो तत्कालीन पूरा स्टाफ ही निलंबित कर दिया गया। पीसीएफ की पहुंच कहें या और कुछ, इस दागी संस्था को फिर भी गेहूं खरीद के सर्वाधिक सेंटर इसी संस्था को दिए गए हैं। भले ही यह संस्था के कई सेंटर बंद पड़े हैं।
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यहां बता दें कि जिले में गेहूं खरीद बड़ी जिम्मेदारी का काम है। पिछले वर्षों में गेहूं खरीद में बड़े खेल हुए हैं। सेंटरों पर ऐसे जुगाड़ू कर्मचारी रखे जाते रहे हैं, जो किसानों का दोहन करते रहे हैं। इस बार गेहूं खरीद ऐसी होनी चाहिए थी कि किसानों को दोहन न हो। किसान को बेमौसम बरसात, ओले और हवाओं ने पहले ही मार रखा है। उसकी फसलें बर्बाद हो र्गइं। हालत इतने गंभीर हैं कि अब तक जिले में दर्जनों किसान मर चुके हैं। इन हालातों में गेहूं क्रय केंद्र तो ठीक चलें। किसानों को दोहन न हो सके।
इन तमाम बातों पर उच्चाधिकारियों के बीच भी चर्चाएं हुई हैं। इसके बावजूद जिले में गेहूं सेंटरों का आवंटन हुआ तो पता चला है कि 114 क्र्रय केंद्रों में सर्वाधिक क्रय केंद्र पीसीएफ को दिए गए हैं। विपणन विभाग जो क्रय के मामले में सबसे अहम भूमिका निभाता रहा है। उसके लिए मात्र आठ सेंटर ही हैं। जिले में करीब 50 सेंटर हैं जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। इनमें सबसे अधिक सेंटर पीसीएफ के ही हैं।
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किसको कितने मिले हैं गेहूं क्रय केंद्र
विपणन विभाग- 08
पीसीएफ-       45
एफसीआई-     07
यूपीएसएस-     40
यूपी एग्रो-       06
ककनि-         04
एफसीआई-     04
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योग-            114
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प्रदेश स्तर से ही पीसीएफ को गेहूं खरीद में शामिल किया गया है। पीसीएफ में सभी एक से नहीं होंगे। उनपर पूरी निगरानी रहेगी। एसडीएम को निर्देश दे दिए गए हैं कि गड़बड़ियों पर नजर रखें वहीं जो केंद्र बंद मिलें उनकी जानकारी दें ताकि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके। - आरपी यादव, एडीएम वित्त/ प्रभारी गेहूं खरीद
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