उझानी (बदायूं)। गुरुवार शाम के बाद शुक्रवार को बारिश के साथ कई इलाकों में हुई ओलावृष्टि ने सब्जियों के राजा आलू समेत सरसों की फसल को चपेट में ले लिया। आलू में करीब 30 फीसदी नुकसान की आशंका के बीच सरसों के खेतों में भी पानी भर गया। आलू में हालांकि अभी दाना नहीं पड़ा है लेकिन ओले गिरने से उसकी पत्तियां दागी हो गईं। मौसम की इस मार से टमाटर, गोभी और शिमला मिर्च भी संकट है। अगर तेज हवा के झोंके चले तो सरसों को सर्वाधिक नुकसान होगा।
दूसरे दिन भी बारिश होते रहने से गनीमत रही जो तेज हवा नहीं चली। तेज हवा चलने से सरसों की फसल का सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता था लेकिन शुक्रवार को जिले में उझानी, बिसौली और कादरचौक क्षेत्र के कई इलाके में ओलों की हल्की बौछार ने आलू की फसल को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया। अगेती आलू की फसल के साथ ही शिमला मिर्च और पत्तेदार सब्जियों में गोभी, पालक और मेथी दागी हो गई। खेतों में बारिश का पानी भी इकट्ठा हो गया है। अगर एक-दो दिन में तेज हवा चली तो सरसों की फसल जमींदोज हो सकती है। ओलावृष्टि से मटर की फसल को भी नुकसान की आशंका के बीच किसानों में मिहौना निवासी चंद्रपाल सिंह ने बताया कि जिले में सब्जी फसलों का इस बार रकबा भी करीब 15 फीसदी बढ़ा है लेकिन ओले पड़ने से खासकर आलू की फसल की 30 फीसदी तक नुकसान हो गया है। इसके विपरीत गेहूं की फसल को फायदा हुआ है। करीब 25 दिन तक की हो चुकी गेहूं की फसल को इन दिनों पहली सिंचाई की जरूरत थी जो मौसम के अचानक बदले मिजाज से पूरी हो गई है। पहली सिंचाई के बाद ही गेहूं की फसल में कल्ले फूटने का समय होता है। उसे तो ये बारिश संजीवनी का काम करेगी।
गेहूं के अनुकूल माहौल बनने से बंपर पैदावार की उम्मीद
उझानी। गेहूं उत्पादकों में नगर निवासी छोटेलाल की मानें तो हल्की ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं हो सकता। ऐसे समय में बारिश हुई है जब गेहूं की फसल को बढ़वार के लिए मौसम अनुकूल होना चाहिए। ठंड में इजाफा और समय रहते सिंचाई की जरूरत पूरी हो जाने से उत्पादन भी अच्छा रहेगा। महीना भर के दौरान अगर एक बार फिर बारिश हुई तो पैदावार बंपर होगी। सबसे अच्छी बात तो यह कि सिंचाई के लिए लागत के रूप में अतिरिक्त खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा।
मौसम के मिजाज को लेकर अभी कुछ ज्यादा कहा नहीं जा सकता। बारिश शनिवार को भी हो सकती है। ओलावृष्टि नहीं हुई तो किसी भी फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। नुकसान की जिस तरह की आशंका है, वह ओलावृष्टि को लेकर ही बनी हुई है। सब्जी वर्गीय फसलें ही संकट में हैं।
- डॉ. संजय कुमार, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र।
बारिश ने तो कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन ओलावृष्टि ने आलू की फसल चपेट में ली है। आलू की फसल पर एक तो पहले से ही लागत काफी आती है, ऐसे में फसल प्रभावित हो जाए तो उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। मौसम की मार ने किसानों को ही नुकसान पहुंचाया है।
-नाजिम, बनगढ़
गेहूं की फसल का फायदा होने से खुशी का माहौल बना है लेकिन सब्जी फसलों को जिस तरह से नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना मुश्किल हो जाएगा। आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। कहीं सरसों भी तबाही के कगार पर नहीं पहुंच जाए। यही सोचकर पसीना छूट रहा है।
-साधुराम पाठक, हसनपुर
मौसम की मार कब तक पड़ेगी, इसी आशंका में सब्जी उत्पादकों की परेशानी बढ़ी हुई है। शिमला मिर्च और टमाटर की फसल से बहुत उम्मीद बंधी थी कि आने वाले दिनों में उन्हें आर्थिक संकट से उबार लेगी लेकिन मौसम से दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
-नत्थू सिंह, गंज
ठंड के दौरान मौसम के मिजाज को देखकर बृहस्पतिवार रात से ही किसानों की चिंता बढ़ गई है। रात में बादलों में गड़गड़ाहट के साथ जब भी बिजली चमकी, आवाज सुनकर ही सिहर उठे। अब तो ईश्वर के भरोसे ही सबकुछ छोड़ दिया गया है।
-रामौतार, कुवरगांव