किशोरियों को सशक्त बनाए के लिए शिक्षा विभाग भरसक प्रयास कर रहा है। साथ ही शिक्षा को अनमोल बताते हुए लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास जारी है। इसी क्रम में किशोरियों को शिक्षा के प्रति रूचि बढ़ाने तथा कुप्रथा के खिलाफ अभिभावकों, ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
लखनऊ से आई टीम शहर के स्काउट भवन में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डनों तथा फुल टाइम टीचर्स को प्रशिक्षण दे रही हैं। तीन दिन चलने वाली ट्रेनिंग का उद्देश्य किशोरियों को सशक्त बनाना है। टीम में शामिल रिसोर्स पर्सन/टेनर्स स्वाती त्रिपाठी, डॉ. कविता, स्वर्णिमा सिंह प्रशिक्षण दे रहीं हैं। जनजागृति कार्यक्रम के प्रशिक्षण में बताया जा रहा है कि आखिर ग्रामीणों अंचल की छात्राओं में किस प्रकार शिक्षा के प्रति रूझान पैदा करें। मायने बताने के साथ ही समाज को जागरूक करने और चली आ रही कुप्रथा जैसे बाल विवाह, दहेज, छात्राओं के अधिकारों का हनन आदि की भी बारीकी से जानकारी दी जा रही है।
मंगलवार को वार्डनों और टीचर्स को चार्ट, प्रोजेक्ट, प्रोजेक्टर के माध्यम से जानकारियां दीं। इस मौके पर बालिका शिक्षा जिला समन्वयक सीमा चौहान, यूनिसेफ के फूल मोहम्मद अंसारी, गौरव सक्सेना, आनंद आदि मौजूद रहे।
जिले के कई क्षेत्र शिक्षा से अछूते: स्वाती
रिसोर्स पर्सन स्वाती बताती हैं कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जो शिक्षा से दूर हैं। खासकर छात्राओं की शिक्षा पर अभिभावक अभी भी ज्यादा ध्यान देना जरूरी नहीं समझते हैं। यह सिर्फ और सिर्फ अज्ञानता का ही कारण है, जिसे दूर करना है।
ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक: कविता
डॉ. कविता बताती हैं कि समाज में ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ उनसे मैत्रीपूर्ण रवैया अपनाना होगा। ताकि वह छात्राओं की शिक्षा को जरूरी समझें और छात्राओं को मिलने वाले सभी अधिकार दें।