बदायूं। उसहैत के गांव खेड़ा जलालपुर में बुखार से हुई 13 साल की किशोरी की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमा जाग गया। शुक्रवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच कर लोगों को दवा दी, वहीं कर्मचारियों से सफाई कार्य कराया गया। गांव में सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित मिले। उधर, सीएमओ की जांच कमेटी में किशोरी की मौत का कारण झोलाछाप का गलत इलाज करना पाया गया।
जांच में पाया गया है कि गांव में बुखार के मरीज तो हैं, लेकिन गांव में न तो लार्वा पाया गया है न ही डेंगू व मलेरिया के मरीज ही मिले। शुक्रवार को विभाग की टीम ने 100 से अधिक लोगों की जांच की। बुखार के मरीजों को दवा दी गई है। वायरल बुखार की चपेट में लोग हैं। ऐसे में प्लेटलेट्स कम होना स्वाभाविक है। 13 साल की किशोरी की मौत झाेलाछाप के गलत इलाज से होना सामने आया है।
स्वास्थ्य विभाग उसावां की टीम ने गांव में लोगों की जांच की। सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित पाए गए। जांच में मलेरिया न ही किसी में डेंगू के लक्षण मिले। सीएमओ ने क्षेत्र में अवैध तरीके से इलाज कर रहे झोलाछापों पर कार्रवाई करने के निर्देश एमओआईसी को दिए हैं। गांव में गंदगी के अंबार मिले हैं। सफाई व्यवस्था चौपट मिली। अधिकारियों ने एक साथ 35 कर्मचारी गांव में लगाकर सफाई कार्य कराया। गांव के लोग उस समय अचंभित रह गए जिस समय गांव की हर गली में कर्मचारी सफाई करता दिखा।
एमओआईसी राहुल सिद्धार्थ ने बताया कि किशोरी की मौत का सही कारण पता नहीं चल सका है, परिजनों में किसी को डेंगू या मलेरिया के लक्षण नहीं मिले हैं। आसपास लार्वा भी नहीं पाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि किशोरी की मौत झोलाछाप के गलत इलाज से हुई होगी।
गांव में पिछले साल संक्रमण से गईं थीं 70 जानें
गांव के रामसेवक ने बताया कि उनकी 13 वर्षीय बेटी लक्ष्मी को सात दिन से बुखार आ रहा था। वह खेती करते हैं, उनकी पांच बेटियों में लक्ष्मी दूसरे नंबर की थी। एक बेटा है। जांच कराई तो डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि की। इलाज कटरा और उसहैत में बिना डिग्री वाले डॉक्टर के यहां चल रहा था। बुधवार रात हालत अधिक खराब हुई तो उसको बदायूं ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
पिछले साल गांव में करीब 70 लोगों की मौत संक्रमण से हुई थी। करीब 50-60 लोग बुखार से तप रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई भी डॉक्टर गांव में नहीं पहुंचा था। साथ ही गांव में गंदगी के ढेर लगे हुए थे। महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। साथ ही टूटी सड़कों पर गंदगी फैली हुई थी। खबर प्रकाशित होते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम समेत सफाई कर्मचारियों को गांव में लगाकर सफाई कार्य कराया गया है। लोगों की जांच कर शुक्रवार को दवा भी दी गई है।
टीम ने गांव में शिविर लगाकर बुखार पीड़ित लोगों की जांच की, लेकिन मलेरिया-डेंगू का प्रकोप गांव में नहीं है। वायरल से लोग पीड़ित मिले हैं। बच्ची की मौत का कारण झोलाछाप का गलत इलाज करना पाया गया है। ऐसे झोलाछापों पर कार्रवाई की जाएगी। -रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ, बदायूं
खेड़ा जलालपुर में जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
खेड़ा जलालपुर में जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद