एक नेता ने अपनी जमीन की कीमत बढ़वाने के लिए लगा दिया था पंच
जगह और मुआवजा तय हो जाने के बाद भी नहीं हो सका बाइपास का काम शुरू
बाइपास के निर्माण को 7.50 करोड़ की धनराशि भी हो चुकी थी रिलीज
बिल्सी का दूसरा बाइपास पहले मंजूर हो चुका है। यह बहुत कम लोग जानते हैं लेकिन यह भी बहुत कम लोगों को पता है कि इसमें बिल्सी नगर का ही एक नेता बाधा बन गया। इस नेता ने बिल्सी विधानसभा से टिकट लेने का प्रयास भी किया था।
आज तक इस बाइपास का मामला फाइलों में कैद अंतिम सांसे ले रहा है। दूसरा बाइपास न होने के कारण आधे शहर में प्रवेश कर वाहनों को गुजरना पड़ता है। इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और हर समय दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
वर्ष 2005-06 में बिल्सी शहर के लिए बाइपास मंजूरी के साथ 7.50 करोड़ रुपये मंजूर भी हो गए थे। तत्कालीन सांसद के एक करीबी बिल्सी निवासी नेता ने इस बाइपास को उत्तर-पश्चिम की जगह बिल्सी के दक्षिण-पश्चिम से निकालने के लिए अपनी पहुंच का लाभ उठाया। जैसा की लोग कहते हैं कि दक्षिण-पश्चिम में इस नेता की भू संपत्तियां हैं। वह चाहता था कि इन भू संपत्तियों की कीमत बढ़ जाएंगी और उसे इसका भारी लाभ होगा।
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किसान को मुआवजा भी हो चुका था तय
बाईपास के लिए सभी तैयारियां पूरी हो गईं। मुआवजा भी सर्किल रेट से चार गुना दिए जाने की बात हो गई। उसी समय यहां का सर्किल रेट लागू हुआ था। मगर, नेता ने जनता की भलाई को दरकिनार कर अपने फायदे के लिए बाइपास को अपनी मर्जी पर दक्षिण-पश्चिम में लाने को जीजान लगा दिया। मुआवजा को जब फाइल कमिश्रर के यहां पहुंची तो वहीं की होकर रह गई। आजतक इस मामले में आगे कोई बात नहीं हुई है। बाईपास और उसकी फाइल जहां की तहां दबकर रह गई है।
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मौजूदा हालत में इसलिए चाहिए नया बाइपास
बिल्सी में मौजूदा बाइपास अंबियापुर पर बिसौली और वजीरगंज रोड का जोड़ता है तो इसका दूसरा किनारा कासगंज रोड को जोड़ता है। मुख्यत: दिल्ली को जाने वाले मार्ग के लिए अंबियापुर से शहर में बड़े वाहन प्रवेश करते हैं। जो मोहल्ला आठ, मोहल्ला एक में होकर मोहल्ला दो पर बस्ती में है। इसमेे साहबगंज और तहसील गेट का बाजार भी है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी है और संभावनाएं भी रहती हैं। इसलिए एक और बाईपास की यहां महती जरूरत है।
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उत्तर-पश्चिम से बनना था दूसरा बाइपास
दूसरा बाइपास बदायूं रोड पर वजीरगंज मार्ग को क्रास करता हुआ बिसौली मार्ग को दिधौनी के समीप क्रास कर दिल्ली मार्ग से जुड़ना था। इससे बड़े वाहनों के शहर में घुसने की जरूरत नहीं पड़ती और न दुर्घटनाएं होतीं। पूरी तरह से मंजूर और आखिरी पायदान पर निर्माण को तैयार बाईपास का अब कोई नाम लेवा तक नहीं है। बिल्सी या जिले का कोई नेता भी बिल्सी वासियों को इस सौगात को दोबारा प्रयास कर लाने का प्रयास भी नहीं कर रहा है।